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आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी: पद छोड़ने के बाद आईएएस बहरा के फर्जी चेक से निकाले गए पंचायत विभाग के पैसे

आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 25 Feb 2026 11:05 AM IST
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सार

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से यह पैसा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के खाते में डाले गए। पंचायत विभाग ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से भी रिकॉर्ड मंगवाया था, मगर इस बैंक ने अपना रिकॉर्ड पंचायत विभाग को जमा नहीं कराया।

IDFC Bank fraud Panchayat department money withdrawn through fake cheque of IAS Bahra after he quit
आईडीएफसी बैंक - फोटो : फाइल
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विस्तार

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में धोखाधड़ी की परतें खुलने लगी हैं। बैंक में विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व निदेशक डीके बहरा के फर्जी चेक व फर्जी डेबिट नोट से पैसे निकाले गए। 

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डीके बहरा 28 अक्तूबर को विभाग का चार्ज छोड़ चुके हैं। इसके बावजूद उनके हस्ताक्षरयुक्त फर्जी चेक से बैंक से पैसे निकलते रहे जबकि विभाग ने बैंक में नए निदेशक के हस्ताक्षर अपडेट करवा दिए थे।
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एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज एफआईआर के मुताबिक पंचायत विभाग ने 26 सितंबर 2025 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में एक-एक खाता खुलवाया। आईडीएफसी बैंक में 50 करोड़ रुपये और एयू स्मॉल बैंक में 25 करोड़ रुपये जमा करवाए गए। यह मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना का पैसा था। 

जनवरी में विभाग को बैंक के स्टेटमेंट में कुछ गड़बड़ी दिखाई दी। विभाग ने बीती 13 जनवरी को दोनों बैंकों से कहा गया कि वे विभाग का खाता बंद कर एक्सिस बैंक में सारा पैसा ट्रांसफर कर दें। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने सारा पैसा ब्याज के साथ जमा कर दिया लेकिन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 50 करोड़ में से सिर्फ एक करोड़ 27 लाख रुपये जमा कराए। इस पर विभाग ने बैंक को रिकॉर्ड के साथ तलब कर लिया।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के रिकॉर्ड को जब खंगाला गया तो पता चला कि पूर्व निदेशक बीके बहरा के हस्ताक्षरयुक्त फर्जी चेक व फर्जी डेबिट नोट से एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में पैसे ट्रांसफर किए गए जबकि बहरा 28 अक्तूबर को पद छोड़ चुके थे। जांच में यह भी सामने आया है कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से यह पैसा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के खाते में डाले गए। पंचायत विभाग ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से भी रिकॉर्ड मंगवाया था, मगर इस बैंक ने अपना रिकॉर्ड पंचायत विभाग को जमा नहीं कराया। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से ही 14 बार लेन देन के जरिये करीब 47 करोड़ रुपये दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर हुए। इस मामले में अब एंटी करप्शन ब्यूरो सभी पहलुओं से बारीकी से जांच कर रही है। 

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