Chandigarh: शेयर वाइज प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री का रास्ता साफ, चंडीगढ़ प्रशासन को सौंपी विस्तृत रिपोर्ट
2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने रिहायशी संपत्तियों में शेयर वाइज रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। इसके चलते शहर के कई लोगों को अपनी संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
विस्तार
चंडीगढ़ में लंबे समय से रुकी शेयर वाइज प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर अब रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। प्रशासन के लीगल विभाग ने इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है जिसमें कुछ मामलों में रजिस्ट्री की अनुमति देने की कानूनी गुंजाइश बताई गई है।
रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने शेयर वाइज प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री का रास्ता खोलने के लिए नोटिफिकेशन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसे प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद अधिसूचित किया जाएगा।
इस फैसले से शहर के कई सेक्टरों में रुकी हुई प्रॉपर्टी रजिस्ट्री फिर से शुरू होने की उम्मीद है। वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने रिहायशी संपत्तियों में शेयर वाइज रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। इसके चलते शहर के कई लोगों को अपनी संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों, प्रॉपर्टी डीलरों और व्यापारिक संगठनों ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किए। यह मामला संसद में भी उठ चुका है।
प्रशासन के कानूनी विभाग ने एस्टेट ऑफिस को दी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी 2023 के फैसले में खास तौर पर चंडीगढ़ के फेज-1 के सेक्टरों को लेकर निर्देश दिए गए थे।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि इन सेक्टरों में रिहायशी संपत्तियों का विखंडन या उन्हें अपार्टमेंट में बदलना शहर के मूल वास्तुकार ली कार्बूजिए की मूल अवधारणा के खिलाफ है इसलिए फेज-1 के सेक्टरों में मकानों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने या अपार्टमेंटाइजेशन पर प्रतिबंध जारी रहेगा। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संपत्ति के स्वामित्व के हस्तांतरण से जुड़े कुछ मामलों में रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक जरूरी नहीं है। विशेष रूप से उन मामलों में जहां किसी संपत्ति का पूरा हिस्सा एक ही व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया जा रहा हो, उसे संपत्ति के विभाजन की श्रेणी में नहीं माना जाएगा।
परिवार से बाहर भी संभव होगा 100 प्रतिशत हस्तांतरण
कानूनी राय में कहा गया है कि यदि किसी संपत्ति मालिक ने अपनी पूरी संपत्ति किसी व्यक्ति के नाम वसीयत की है, चाहे वह व्यक्ति परिवार से संबंधित न हो, तो उस स्थिति में 100 प्रतिशत हिस्सा उसके नाम ट्रांसफर किया जा सकता है। इसे संपत्ति के विभाजन या अपार्टमेंटाइजेशन के रूप में नहीं माना जाएगा। यदि वसीयत विधिक रूप से वैध है और सभी औपचारिकताएं पूरी हैं तो प्रशासनिक अधिकारी उसे खारिज नहीं कर सकते। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वसीयत केवल तभी अमान्य मानी जा सकती है जब वह अदालत में चुनौती के अधीन हो, जाली साबित हो जाए या वसीयत बनाने वाला व्यक्ति उस समय कानूनी रूप से सक्षम न हो। अन्यथा वसीयत के आधार पर संपत्ति का हस्तांतरण किया जा सकेगा।
हर मामले की अलग से होगी जांच
कानूनी विभाग ने यह भी कहा है कि प्रशासन को हर मामले की जांच अलग-अलग तथ्यों के आधार पर करनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संपत्ति के हस्तांतरण के नाम पर एक ही मकान को कई अपार्टमेंट में बदलने की कोशिश न की जा रही हो। प्रशासन के इस संभावित फैसले से शहर के प्रॉपर्टी बाजार में लंबे समय से बनी अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है।