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15 करोड़ के हिसाब में फंसा पीजीआई: अमृत फार्मेसी व्यवस्था की सस्ती दवा योजना पर ऑडिट में उठा सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 27 May 2026 04:40 PM IST
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सार
ऑडिट में खुलासा हुआ है कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को दी गई करीब 15 करोड़ रुपये की एडवांस राशि वर्षों बाद भी पूरी तरह समायोजित नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद वित्तीय प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
चंडीगढ़ पीजीआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई में गरीब और गंभीर मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने वाली अमृत फार्मेसी व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है।
ऑडिट में खुलासा हुआ है कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को दी गई करीब 15 करोड़ रुपये की एडवांस राशि वर्षों बाद भी पूरी तरह समायोजित नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद न केवल वित्तीय प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं बल्कि यह चिंता भी बढ़ गई है कि यदि ऐसी गड़बड़ियां जारी रहीं तो इसका सीधा असर उन हजारों मरीजों पर पड़ सकता है जो पीजीआई में रियायती दवाओं पर निर्भर हैं।
ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार पीजीआई प्रशासन ने 2021-22 से 2024-25 के बीच अमृत फार्मेसी के माध्यम से आयुष्मान भारत, हिमकेयर और सीजीएचएस लाभार्थियों को रियायती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को 15 करोड़ रुपये का एडवांस पेमेंट किया था।
31 मार्च 2025 तक इसमें से लगभग 4.26 करोड़ रुपये की राशि असमायोजित मिली। ऑडिट टीम ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि आखिर किन शर्तों और अनुमति के आधार पर जारी की गई थी।
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साथ ही यह भी पूछा गया कि नौ महीने गुजर जाने के बाद भी एडवांस राशि समायोजित क्यों नहीं की गई। दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि पीजीआई की ओर से एचएलएल को मार्च 2025 से आगे रियायती दवाओं की आपूर्ति रोकने का पत्र भेजा गया था, जबकि दूसरी ओर करोड़ों रुपये का हिसाब लंबित था।
ऑडिट में खुलासा हुआ है कि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को दी गई करीब 15 करोड़ रुपये की एडवांस राशि वर्षों बाद भी पूरी तरह समायोजित नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद न केवल वित्तीय प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं बल्कि यह चिंता भी बढ़ गई है कि यदि ऐसी गड़बड़ियां जारी रहीं तो इसका सीधा असर उन हजारों मरीजों पर पड़ सकता है जो पीजीआई में रियायती दवाओं पर निर्भर हैं।
ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार पीजीआई प्रशासन ने 2021-22 से 2024-25 के बीच अमृत फार्मेसी के माध्यम से आयुष्मान भारत, हिमकेयर और सीजीएचएस लाभार्थियों को रियायती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को 15 करोड़ रुपये का एडवांस पेमेंट किया था।
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31 मार्च 2025 तक इसमें से लगभग 4.26 करोड़ रुपये की राशि असमायोजित मिली। ऑडिट टीम ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि आखिर किन शर्तों और अनुमति के आधार पर जारी की गई थी।
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साथ ही यह भी पूछा गया कि नौ महीने गुजर जाने के बाद भी एडवांस राशि समायोजित क्यों नहीं की गई। दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि पीजीआई की ओर से एचएलएल को मार्च 2025 से आगे रियायती दवाओं की आपूर्ति रोकने का पत्र भेजा गया था, जबकि दूसरी ओर करोड़ों रुपये का हिसाब लंबित था।