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पीजीआई शोध में खुलासा: कोलेस्ट्रॉल सामान्य होने पर भी दिल को खतरा, चिप म्यूटेशन बना नया अलाॅर्म

वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 31 Jan 2026 10:58 AM IST
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सार

जिन मरीजों में चिप म्यूटेशन पाया गया, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर अपेक्षाकृत कम था लेकिन उनके परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास ज्यादा देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि यह जोखिम पीढ़ियों तक असर डाल सकता है।  

PGI research reveals normal cholesterol levels heart is at risk gene mutation raises new alarm
हार्ट अटैक - फोटो : AI
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विस्तार
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दिल की बीमारियों को लेकर अब तक आम धारणा रही है कि हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और धूम्रपान ही हार्ट अटैक की मुख्य वजह होते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें मरीज युवा हैं, कोलेस्ट्रॉल सामान्य है और कोई गंभीर बीमारी भी नहीं है, फिर भी अचानक हार्ट अटैक हो गया। 

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पीजीआई में हुए एक शोध ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। इस शोध के मुताबिक हार्ट अटैक के पीछे एक नया और अहम कारण सामने आया है- चिप म्यूटेशन। 

क्या है चिप म्यूटेशन

चिप म्यूटेशन से बनने वाली खून की कोशिकाएं शरीर में धीमी लेकिन लगातार सूजन पैदा करती हैं। यही सूजन दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाती है। 

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समय के साथ धमनियां सख्त होने लगती हैं, उनमें ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है और अंतत: हार्ट अटैक या अन्य हृदय रोग हो सकते हैं। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया सीधे तौर पर कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी नहीं होती। यानी किसी व्यक्ति का एलडीएल कोलेस्ट्रॉल सामान्य या कम होने के बावजूद भी उसे दिल का दौरा पड़ सकता है। यह शोध इंडियन जर्नल ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जनवरी 2026 अंक में प्रकाशित हुआ है। 

खून बनाने वाली कोशिकाओं में जीन संबंधी बदलाव

शोध पीजीआई के डॉ. मयंक सैनी, डॉ. सार्थक वाधेरा, डॉ. रुद्र नारायण स्वैन, डॉ. आनंद बालकृष्णन, डॉ. स्रीजेश श्रीधरनुन्नी, डॉ. अरिहंत जैन, डॉ. राजेश विजयवर्गीय और डॉ. पंकज मल्होत्रा की टीम ने किया है।  शोध में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि चिप का पूरा नाम क्लोनल हेमेटोपोइजिस ऑफ इंडिटरमिनेट पोटेंशियल है। सरल शब्दों में यह खून बनाने वाली कोशिकाओं में होने वाला एक जीन संबंधी बदलाव है। शरीर में खून की कोशिकाएं बोन मैरो में बनती हैं और उम्र बढ़ने या अन्य जैविक कारणों से इनके कुछ जीन में छोटे बदलाव हो जाते हैं। जब ये बदली हुई कोशिकाएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं, तो इस स्थिति को चिप कहा जाता है। यह कोई कैंसर नहीं है लेकिन शरीर के भीतर ऐसी प्रक्रिया शुरू कर देता है जो लंबे समय में गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

भारतीय मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में यह बात और भी स्पष्ट हुई है। शोध में पाया गया कि एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (हार्ट अटैक) के मरीजों में चिप म्यूटेशन की मौजूदगी स्वस्थ लोगों की तुलना में कहीं अधिक थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन मरीजों में चिप म्यूटेशन पाया गया, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर अपेक्षाकृत कम था लेकिन उनके परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास ज्यादा देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि यह जोखिम पीढ़ियों तक असर डाल सकता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह खोज इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि देश में युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

जीन से जुड़ी जांच भी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि हृदय रोग के जोखिम का आकलन करते समय सिर्फ ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। खासकर उन लोगों में, जिनके परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास रहा हो या जिनमें बिना किसी स्पष्ट वजह के हार्ट अटैक हुआ हो, उनमें चिप म्यूटेशन की भूमिका की जांच पर भी विचार किया जाना चाहिए। शोध से यह स्पष्ट होता है कि दिल
की बीमारी हमेशा दिखने वाले कारणों से ही नहीं होती। केवल कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट देखकर निश्चिंत होना सही नहीं है। बार-बार सीने में दर्द, जल्दी थकान, सांस फूलना या दिल से जुड़ी कोई भी असामान्य शिकायत हो तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह और स्वस्थ जीवनशैली आज भी सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं।

ऐसे किया शोध

  • 72 ऐसे मरीज शामिल किए गए जिनकी उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक थी और जिन्हें एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम हुआ
  • तुलना के लिए 36 स्वस्थ लोगों को कंट्रोल ग्रुप में रखा गया
  • जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई बीपी, स्मोकिंग था उन्हें अध्ययन से बाहर रखा गया
  • सभी प्रतिभागियों के रक्त नमूनों की नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक से जांच की गई
  • 42 जीनों में चिप से जुड़े म्यूटेशन तलाशे गए
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