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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Elections 2027 Congress infighting persists: Silence of disgruntled leaders raises election concerns.

कांग्रेस की गुटबाजी बरकरार: नाराज नेताओं की खामोशी से चुनावी बढ़ी चिंता, हाईकमान की चुप्पी से अटकलें तेज

Sat, 01 Aug 2026 02:27 PM IST
Sharukh Khan मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 01 Aug 2026 02:27 PM IST
सार

पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी बरकरार है। नाराज नेताओं की खामोशी से चुनावी चिंता बढ़ गई है। हर बूथ मजबूत अभियान शुरू हो गया है लेकिन चन्नी गुट के वरिष्ठ नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बनाई हुई है। हाईकमान की चुप्पी से अटकलें तेज हो गई हैं।

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Punjab Elections 2027 Congress infighting persists: Silence of disgruntled leaders raises election concerns.
Punjab Elections 2027 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी थमने के बजाय और स्पष्ट होती दिख रही है। संगठन में जिन मुद्दों को लेकर वरिष्ठ नेता लंबे समय से नाराज हैं उनमें अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। हाईकमान ने भी इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। 
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ऐसे में नेताओं की खामोशी पार्टी पर दबाव बढ़ा रही है और विधानसभा चुनाव से पहले इसे कांग्रेस के लिए नुकसान की आशंका के रूप में देखा जा रहा है। शनिवार को पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने फतेहगढ़ साहिब से प्रदेशव्यापी हर बूथ मजबूत अभियान की शुरुआत की। इस दौरान चन्नी गुट के कोई प्रमुख नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। 
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इसे संगठन के भीतर जारी खींचतान का संकेत माना जा रहा है। बघेल का बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद का यह अभियान आठ अगस्त तक विभिन्न जिलों में चलेगा। इसके बाद वह अपनी रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगे।

 

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि नाराज नेताओं की सार्वजनिक चुप्पी भी पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। यदि चुनाव से पहले मतभेद दूर नहीं हुए तो इसका असर संगठन और चुनावी तैयारी दोनों पर पड़ सकता है।
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चन्नी गुट का दबाव बरकरार
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, विधायक सुखपाल सिंह खैरा, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और विधायक राणा गुरजीत सिंह समेत इस धड़े के नेताओं ने अब तक यह सार्वजनिक रूप से नहीं कहा कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ सामान्य है।

यह गुट मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है। फिरोजपुर से सांसद शेर सिंह घुबाया भी कह चुके हैं कि यदि वड़िंग सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलते तो पार्टी में यह स्थिति नहीं बनती। यह गुट चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग भी कर रहा है।

बेटे की रील से फिर चर्चा तेज
विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के बेटे रिदमजीत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक रील साझा की। इसमें चन्नी और उनके समर्थकों के साथ संवाद है- "कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि हम जवाब नहीं देंगे। तैयारी थोड़ी बड़ी है। सब्र रखो, पल-पल का हिसाब लेंगे।" इस पर प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग ने कहा कि रिदमजीत हमारे भी बेटे जैसे हैं और परिवार का हिस्सा हैं।
 

वड़िंग का एकजुटता पर जोर
प्रदेशाध्यक्ष राजा वड़िंग लगातार विवाद को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने शनिवार को फिर चन्नी, रंधावा, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत सभी वरिष्ठ नेताओं को अनुभवी बताते हुए सम्मान जताया। वड़िंग ने कहा कि अध्यक्ष पद उनके लिए सबसे बड़ी चीज नहीं है। पार्टी चाहे पद ले ले या टिकट न दे तब भी वह कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे।

 

राजनीतिक मामलों के जानकार परमजीत सिंह का कहना है कि वड़िंग के बयान नाराज नेताओं को संदेश देने की कोशिश हैं कि मतभेद हो सकते हैं लेकिन पार्टी छोड़ना समाधान नहीं है। उन्हें यह भी आशंका है कि भाजपा और आम आदमी पार्टी नाराज नेताओं के संपर्क में हैं। वहीं प्रभारी भूपेश बघेल ने एक बार फिर दोहराया कि पार्टी में ऑल इज वेल है।
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