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राज्यसभा चुनाव: उलटफेर की रणनीति, अमित शाह के करीबी को हरियाणा भेजा गया; दोनों सीटों पर भाजपा की नजर

आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 10 Mar 2026 08:42 AM IST
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सार

हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर भाजपा और कांग्रेस रणनीति बना रहे हैं। भाजपा ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उपमुख्यमंत्री को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है।

Rajya Sabha elections BJP plans upset in Haryana sends Amit Shah close aide to Haryana
Rajya Sabha elections - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

हरियाणा में राज्यसभा की दोनों सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस अहम चुनाव के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री हर्ष सांघवी को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
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41 वर्षीय सांघवी को पार्टी ने राज्यसभा चुनाव की रणनीति को मजबूत करने और दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। सूरत के मंजूरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सांघवी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। 
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ऐसे में उनके हरियाणा आने को राज्यसभा चुनाव में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। 

भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध और तीसरे उम्मीदवार के रूप में भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। 

ऐसे में भाजपा का पूरा जोर दूसरी सीट पर नांदल को जिताने पर है।नांदल की जीत तभी संभव है, जब उन्हें कांग्रेस के कुछ विधायकों का भी समर्थन मिले। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि सही राजनीतिक प्रबंधन और विधायकों के समन्वय के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 

 

ऐसे में सांघवी की भूमिका विधायकों से संवाद, रणनीतिक समन्वय और मतदान तक राजनीतिक समीकरण साधने में अहम मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व को भरोसा है कि सांघवी अपनी रणनीतिक क्षमता से पार्टी के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेंगे।

 

भाजपा में सांघवी की पहचान एक कुशल प्रबंधनकर्ता और रणनीतिकार के रूप में है। उन्होंने पार्टी के युवा मोर्चा से लेकर सरकार में महत्वपूर्ण पदों तक का सफर तय किया है। यही कारण है कि हरियाणा जैसे संवेदनशील राजनीतिक समीकरण वाले राज्य में राज्यसभा चुनाव की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। 
 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा का यह कदम केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी है। सांघवी को पर्यवेक्षक बनाकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि वह राज्यसभा की दोनों सीटों को प्रतिष्ठा का सवाल मानकर लड़ रही है।

 

अब हरियाणा की राजनीति में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है और क्या सांघवी अपने राजनीतिक प्रबंधन से पार्टी को दोनों सीटों पर जीत दिला पाते हैं। फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश का राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है।
 
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