टीचर्स डे: कंगना रनौत से लेकर मेजर तक रहे हैं डॉ. राकेश सचदेवा के स्टूडेंट, बच्चों को इज्जत देने की पैरोकार
डाॅ. राकेश सचदेवा ने टीचिंग के अपने करियर का अनुभव बताते हुए कहा कि अगर एक टीचर अपने सच्चे मन और लगन से बच्चों को पढ़ाता है तो बच्चे भी पूरी लगन के साथ पढ़ाई करते हैं। और जिंदगी में जब वह कुछ बन जाते है तो उस टीचर को हमेशा याद रखते हैं।
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शिक्षक के नाते हमें बच्चों को प्यार और इज्जत देनी चाहिए, क्योंकि बच्चे प्यार की जुबान को बेहतर तरीके से समझते हैं। यह कहना है डीएवी स्कूल सेक्टर-15 की पूर्व प्रिंसिपल रही डॉ. राकेश सचदेवा का जिन्होंने अपनी पूरा जीवन शिक्षण कार्य में लगा दिया।
पहले शिक्षिका के तौर पर और उसके बाद प्रिंसिपल की भूमिका में बच्चों को आगे बढ़ाने में जीवन लगा दिया। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए बच्चे आज फिल्म जगत, राजनीति में और सेना में अपने हुनर से लोगों के दिलों में राज कर रहे हैं। ये बच्चे अब बड़ी हस्तियां बन गए हैं। ये आज भी इनके संपर्क में रहते हैं, जब भी वह चंडीगढ़ आते हैं तो इनके घर पर इनसे मिलने के लिए जरूर पहुंचते हैं।
डॉ. राकेश सचदेवा ने अपने करियर की शुरुआत अबोहर के बीएड कॉलेज में बतौर लेक्चरर की। इसके बाद फाजिल्का में डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल बनीं और वर्ष 1999 में चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल सेक्टर-15 की प्रिंसिपल बनने बाद वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुईं। पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास के लिए बड़े प्रयास किए। लड़कियों के रहने के लिए छोटे पड़ रहे हॉस्टल को देखकर स्कूल परिसर में लड़कियों के लिए बड़ा हॉस्टल बनाकर दिया।
युवा टीचर्स के लिए सीख
डाॅ. राकेश सचदेवा ने टीचिंग के अपने करियर का अनुभव बताते हुए कहा कि अगर एक टीचर अपने सच्चे मन और लगन से बच्चों को पढ़ाता है तो बच्चे भी पूरी लगन के साथ पढ़ाई करते हैं। और जिंदगी में जब वह कुछ बन जाते है तो उस टीचर को हमेशा याद रखते हैं। टीचर्स को बच्चों को हमेशा इज्जत से पेश आना चाहिए, तभी वह टीचर का सम्मान करेंगे। पढ़ाई के दौरान बच्चों को आने वाली समस्याओं को टीचर को सुलझाना चाहिए। बच्चे जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हो, उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।
इनके मार्गदर्शन में आगे बढ़ीं हस्तियां
डीएवी स्कूल सेक्टर-15 से मॉडल, फिल्म एक्टर और राजनीति में आने वाली कंगना रनौत ने पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान प्रिंसिपल से मॉडलिंग में जाने की इच्छा जताई जिसे उन्होंने अपनी मंजूरी दी और उसका हौसला बढ़ाया। इसके बाद कंगना ने मॉडलिंग के बाद सीधे फिल्म इंडस्ट्री में पांव रखा। वहीं इस स्कूल से सुमन इंडियन आर्मी में मेजर हैं। पंजाब के सबसे कम उम्र के एमएलए बने दविंदर सिंह उनके मार्गदर्शन में पढ़े हैं।