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Chandigarh News: बजट... किसानों, सीमांत क्षेत्रों और युवाओं के रोजगार के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत
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पंकज शर्मा
अमृतसर। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर पंजाब में गहरी निराशा व्यक्त की जा रही है। इस बजट में न तो किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी गई है, और न ही युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस योजना सामने आई है।
आर्थिक विशेषज्ञ प्रो. गुरदास सिंह सेखों ने इस बजट को पंजाब विरोधी बताते हुए कहा कि खेती और सीमावर्ती राज्य के लिए इसमें कोई विशेष पैकेज घोषित नहीं किया गया। राज्य के लंबित ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) की राशि अब तक जारी नहीं की गई, और केंद्र सरकार ने पंजाब का जीएसटी बकाया भी नहीं चुकाया, जो राज्य की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करता है।
उन्होंने कहा कि बजट में उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए गए, जिससे रोजगार और व्यापार दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा, खेती, सिंचाई, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए भी कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया।
किसानों और युवाओं के लिए निराशाजनक बजट
किसान नेता सुच्चा सिंह ने इस बजट को पंजाब के किसानों, युवाओं और व्यापारियों के लिए निराशाजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग मेहनती और संघर्षशील हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने उनके हकों की अनदेखी की है। सिंह ने कहा, पंजाब के लोग मिलकर राज्य को फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ न्याय करे।
सीमांत इलाकों की सुरक्षा और विकास की अनदेखी
बजट में सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, बॉर्डर एरिया में व्यापार को प्रोत्साहन, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी कोई ठोस योजना नहीं दिखाई देती। इससे स्पष्ट होता है कि यह बजट पंजाब के प्रति केंद्र सरकार का भेदभावपूर्ण रवैया दर्शाता है।
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अमृतसर। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर पंजाब में गहरी निराशा व्यक्त की जा रही है। इस बजट में न तो किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी गई है, और न ही युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस योजना सामने आई है।
आर्थिक विशेषज्ञ प्रो. गुरदास सिंह सेखों ने इस बजट को पंजाब विरोधी बताते हुए कहा कि खेती और सीमावर्ती राज्य के लिए इसमें कोई विशेष पैकेज घोषित नहीं किया गया। राज्य के लंबित ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) की राशि अब तक जारी नहीं की गई, और केंद्र सरकार ने पंजाब का जीएसटी बकाया भी नहीं चुकाया, जो राज्य की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करता है।
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उन्होंने कहा कि बजट में उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए गए, जिससे रोजगार और व्यापार दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा, खेती, सिंचाई, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए भी कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया।
किसानों और युवाओं के लिए निराशाजनक बजट
किसान नेता सुच्चा सिंह ने इस बजट को पंजाब के किसानों, युवाओं और व्यापारियों के लिए निराशाजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग मेहनती और संघर्षशील हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने उनके हकों की अनदेखी की है। सिंह ने कहा, पंजाब के लोग मिलकर राज्य को फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ न्याय करे।
सीमांत इलाकों की सुरक्षा और विकास की अनदेखी
बजट में सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, बॉर्डर एरिया में व्यापार को प्रोत्साहन, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी कोई ठोस योजना नहीं दिखाई देती। इससे स्पष्ट होता है कि यह बजट पंजाब के प्रति केंद्र सरकार का भेदभावपूर्ण रवैया दर्शाता है।
