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Chandigarh News: 14 मार्च की मध्य रात्रि में सूर्य करेंगे मीन राशि में प्रवेश
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चंडीगढ़। जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को खरमास, मीनार्क मास या मीन संक्रांति कहा जाता है। इस एक महीने की अवधि में सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश आदि वर्जित हैं। इसे खरमास भी कहा जाता है। यह बात सेक्टर 28 के खेड़ा शिव मंदिर मंदिर पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कही है।
उन्होंने कहा कि चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी 14 मार्च की मध्यरात्रि 1:01 बजे सूर्य भगवान कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। शनिवार के दिन जब उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और मकर राशि में चंद्रमा स्थित रहेंगे। उसी समय सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय के दौरान शुक्रादित्य योग बनेगा। नक्षत्रानुसार इस संक्रांति का नाम नंदा होगा। यह संक्रांति अध्यापकों, कथावाचकों, प्रवचनकर्ताओं, लेखकों और आचार्यों के लिए लाभप्रद रहेगी। समाज में संपन्नता बढ़ेगी। खरमास का समापन 14 अप्रैल मंगलवार को होगा, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
खरमास में क्यों वर्जित हैं मांगलिक कार्य
सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का मजबूत होना अनिवार्य है। खरमास के दौरान सूर्य अपने गुरु बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सूर्य का प्रभाव और तेज कम हो जाता है, जिससे इस अवधि में किए गए कार्यों के पूर्ण प्राप्त नहीं होते। विशेषकर विवाह के लिए तो गुरु बल और शुक्र बल का होना आवश्यक है, जो खरमास में क्षीण माना जाता है।
आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व
दान, पुण्य और विष्णु-भक्ति के लिए यह महीना बहुत श्रेष्ठ है। खरमास आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना अत्यंत फलदायी है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, श्रीहरि कीर्तन और सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष लाभकारी माना गया है। इस माह में दान-पुण्य, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में श्रीरामचरितमानस का पाठ, श्रीमद्भागवत पाठ,गौ सेवा, तीर्थ यात्रा, पवित्र नदियों में स्नान, सुंदरकांड का पाठ व अन्य धार्मिक कृत्य करने का हजारों गुणा फल प्राप्त होता है। जो साधक इस दौरान संयम और नियम से रहते हैं, उन्हें वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
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उन्होंने कहा कि चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी 14 मार्च की मध्यरात्रि 1:01 बजे सूर्य भगवान कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। शनिवार के दिन जब उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और मकर राशि में चंद्रमा स्थित रहेंगे। उसी समय सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय के दौरान शुक्रादित्य योग बनेगा। नक्षत्रानुसार इस संक्रांति का नाम नंदा होगा। यह संक्रांति अध्यापकों, कथावाचकों, प्रवचनकर्ताओं, लेखकों और आचार्यों के लिए लाभप्रद रहेगी। समाज में संपन्नता बढ़ेगी। खरमास का समापन 14 अप्रैल मंगलवार को होगा, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
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खरमास में क्यों वर्जित हैं मांगलिक कार्य
सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का मजबूत होना अनिवार्य है। खरमास के दौरान सूर्य अपने गुरु बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सूर्य का प्रभाव और तेज कम हो जाता है, जिससे इस अवधि में किए गए कार्यों के पूर्ण प्राप्त नहीं होते। विशेषकर विवाह के लिए तो गुरु बल और शुक्र बल का होना आवश्यक है, जो खरमास में क्षीण माना जाता है।
आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व
दान, पुण्य और विष्णु-भक्ति के लिए यह महीना बहुत श्रेष्ठ है। खरमास आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना अत्यंत फलदायी है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, श्रीहरि कीर्तन और सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष लाभकारी माना गया है। इस माह में दान-पुण्य, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में श्रीरामचरितमानस का पाठ, श्रीमद्भागवत पाठ,गौ सेवा, तीर्थ यात्रा, पवित्र नदियों में स्नान, सुंदरकांड का पाठ व अन्य धार्मिक कृत्य करने का हजारों गुणा फल प्राप्त होता है। जो साधक इस दौरान संयम और नियम से रहते हैं, उन्हें वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।