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पीयू में आरएसएस प्रचारक को बुलाने पर हंगामा: पुलिस-छात्रों में धक्कामुक्की, पगड़ी खुली, केशों की बेअदबी के आरोप<bha>;</bha> 30 छात्रों को हिरासत में लिया

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 03:05 AM IST
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UPSC incites uproar over RSS pracharak's invitation: Police and students scuffle, turban undone, allegations of hair desecration; 30 students detained
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में सोमवार को आरएसएस प्रचारक बनवीर सिंह को कार्यक्रम में बुलाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विरोध कर रहे विद्यार्थियों और पुलिस के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई जिसमें कई सिख छात्रों की पगड़ियां खुल गईं। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके केशों की बेअदबी हुई और कुछ छात्रों की किरपाण भी छीन ली गई। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने करीब 40 विद्यार्थियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में दोपहर करीब एक बजे छोड़ दिया गया। हालांकि पुलिस ने लाठीचार्ज के आरोपों को खारिज किया है।
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पूरा घटनाक्रम पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में श्री गुरु तेग बहादुर जी के जन्म दिहाड़े पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर हुआ जिसमें आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक बनवीर सिंह को बतौर वक्ता आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा भाजपा नेता इकबाल सिंह लालपुरा भी पहुंचे। कार्यक्रम से पहले ही विभिन्न छात्र संगठनों ने इसके विरोध का एलान कर दिया था। सोमवार सुबह करीब नौ बजे से छात्र स्टूडेंट्स सेंटर पर एकत्र होने लगे और कार्यक्रम में बनवीर सिंह को बुलाए जाने के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। यह कार्यक्रम पीयूसीएसी के पूर्व अध्यक्ष अनुराग और एबीवीपी के पूर्व सदस्य विशाल मालिक की ओर से आयोजित किया गया था
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प्रदर्शन में स्टूडेंट फॉर सोसाइटी, सत्थ, पीएसयू ललकार, एएसएस और पंजाब नामा स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े विद्यार्थी शामिल थे। इन संगठनों के छात्रों का आरोप था कि जिन व्यक्तियों का सिख इतिहास और विचारों को लेकर पहले भी विवाद रहा है, उन्हें विश्वविद्यालय में वक्ता के तौर पर बुलाना उचित नहीं है।
इसी दौरान चंडीगढ़ पुलिस की भारी टुकड़ी विश्वविद्यालय परिसर में तैनात कर दी गई। जब प्रदर्शनकारी छात्र स्टूडेंट्स सेंटर से लॉ ऑडिटोरियम की ओर कूच करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हो गई। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए लाठियां भी चलाईं। धक्का-मुक्की के दौरान कई सिख छात्रों की पगड़ियां खुल गईं और कुछ के कपड़े तक फट गए।
प्रदर्शनकारी छात्रों जोबनप्रीत, राजविंदर सिंह, अशमीत सिंह, विक्की धनोआ और दर्शनप्रीत ने यह भी आरोप लगाया कि अमृतधारी सिख विद्यार्थियों के साथ बदसलूकी की गई और उनके केशों का अपमान हुआ। कुछ छात्रों का कहना था कि पुलिस ने उनकी किरपान तक छीन ली। इस घटना के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। करीब तीन घंटे तक विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बना रहा। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए करीब 40 छात्रों को हिरासत में लेकर पुलिस गाड़ियों में बैठाया और थाने ले गई। हिरासत में लिए जाने के दौरान भी विद्यार्थी नारेबाजी करते रहे।
इधर, कार्यक्रम के दौरान लॉ ऑडिटोरियम के भीतर भी विरोध की आवाज उठी। कार्यक्रम के बीच दो छात्राओं ने अचानक खड़े होकर आरएसएस और भाजपा के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने स्टूडेंट्स सेंटर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और कहा कि विद्यार्थियों के साथ धक्का-मुक्की क्यों की गई और इतनी बड़ी संख्या में पुलिस क्यों तैनात की गई है।
छात्राओं ने यह भी कहा कि सिखों को किसी से खतरा नहीं है, क्योंकि उनकी रगों में साहिबजादों का खून दौड़ता है। इतना कहते ही महिला पुलिसकर्मियों ने दोनों छात्राओं को हिरासत में लेकर ऑडिटोरियम से बाहर ले जाकर पुलिस वाहन में बैठा दिया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब बनवीर सिंह ऑडिटोरियम से बाहर निकले तो बाहर मौजूद विद्यार्थियों ने फिर से बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया।
वहीं पीयूसीएसी अध्यक्ष गौरववीर सिंह सोहल ने कहा कि विश्वविद्यालय विचारों के आदान-प्रदान का मंच है और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि आरएसएस सभी धर्मों का सम्मान करती है और इस कार्यक्रम का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार किसी वक्ता को बुलाने का विरोध करना उचित नहीं है।
छात्रों की भावनाओं का सम्मान, स्थिति शांत करने की कोशिश करेंगे: प्रो. वाईके रावल
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. वाईके रावल ने कहा कि कुछ छात्रों के समूह ने श्री गुरु तेग बहादुर को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया था और विश्वविद्यालय ऐसा मंच है जहां अलग-अलग विचारों और मतों पर खुलकर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह भी जरूरी है कि किसी भी चर्चा से आपसी नफरत या तनाव न बढ़े। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के दौरान सिर्फ एहतियाती कदम उठाए ताकि कार्यक्रम में कोई बाधा या गड़बड़ी न हो। यूनिवर्सिटी छात्रों की भावनाओं को समझती है। यदि किसी को इस दौरान अनजाने में ठेस पहुंची है तो प्रशासन उसकी भावनाओं का सम्मान करते हुए स्थिति को शांत करने और सभी पक्षों को संतुष्ट करने की कोशिश करेगा।
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