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Raipur news: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया कड़ा फैसला
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 24 Jun 2026 04:12 PM IST
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सार
रायपुर में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और पुलिस विवेचना को आधार मानते हुए यह फैसला सुनाया।
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी रायपुर में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और पुलिस विवेचना को आधार मानते हुए यह फैसला सुनाया।
यह मामला वर्ष 2025 में सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। पुलिस ने अपराध क्रमांक 264/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(2)(एम), 115(2), 351(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत आरोपी मनोज महिलांग के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
प्रकरण दर्ज होने के बाद सिविल लाइन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पुलिस ने नाबालिग पीड़िता के बयान सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध पाया।
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20 वर्ष का सश्रम कारावास
विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी मनोज महिलांग को नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले को बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण और सख्त संदेश माना जा रहा है।
पीड़िता की पहचान रखी गई गोपनीय
पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई और सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन किया गया। पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मामले की विवेचना पूरी कर न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि बच्चों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित करने में मददगार साबित हो सकती है।
यह मामला वर्ष 2025 में सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। पुलिस ने अपराध क्रमांक 264/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(2)(एम), 115(2), 351(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत आरोपी मनोज महिलांग के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
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प्रकरण दर्ज होने के बाद सिविल लाइन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पुलिस ने नाबालिग पीड़िता के बयान सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध पाया।
20 वर्ष का सश्रम कारावास
विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी मनोज महिलांग को नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले को बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण और सख्त संदेश माना जा रहा है।
पीड़िता की पहचान रखी गई गोपनीय
पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई और सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन किया गया। पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मामले की विवेचना पूरी कर न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि बच्चों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित करने में मददगार साबित हो सकती है।