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जगदलपुर: रेलवे की कार्रवाई से प्रभावित 34 परिवार बेघर, कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 16 Oct 2025 03:40 PM IST
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सार
जगदलपुर के संजय गांधी वार्ड क्रमांक 34 में रेलवे प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के चलते 34 मकान तोड़े जा चुके हैं, जिससे करीब 150 लोग बेघर हो गए हैं।
कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जगदलपुर के संजय गांधी वार्ड क्रमांक 34 में रेलवे प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के चलते 34 मकान तोड़े जा चुके हैं, जिससे करीब 150 लोग बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास, भोजन, पुनर्वास और मुआवजा की मांग को लेकर गुरुवार को पार्षद एवं उपनेता प्रतिपक्ष कोमल सेना और शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य के नेतृत्व में बस्तर कलेक्टर एस. हरीश को ज्ञापन सौंपा गया।
पार्षद कोमल सेना ने बताया कि कार्रवाई के बाद परिवारों के सामने आवास, भोजन और जीवनोपयोगी वस्तुओं की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने मांग की कि जब तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक शेष मकानों को न तोड़ा जाए। साथ ही उचित पुनर्वास नीति बनाकर स्थायी भूमि या आवास उपलब्ध कराए जाएं।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि दीपावली जैसे बड़े त्यौहार के समय प्रभावित परिवार सड़कों पर जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं। न तो कोई विस्थापन नीति अपनाई गई है और न ही पुनर्वास योजना। वर्षों से यहां रह रहे लोग नगर निगम को जल, बिजली और करों का भुगतान करते आए हैं, ऐसे में बिना पुनर्वास योजना के मकान तोड़ना अन्यायपूर्ण और मानवाधिकारों के विपरीत है।
कांग्रेस ने मांग की कि प्रशासन तत्काल प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास, भोजन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराए और यदि यह क्षेत्र अतिक्रमण में आता है तो उचित पुनर्वास एवं मुआवजा योजना बनाकर लोगों को बसाया जाए।
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पार्षद कोमल सेना ने बताया कि कार्रवाई के बाद परिवारों के सामने आवास, भोजन और जीवनोपयोगी वस्तुओं की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने मांग की कि जब तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक शेष मकानों को न तोड़ा जाए। साथ ही उचित पुनर्वास नीति बनाकर स्थायी भूमि या आवास उपलब्ध कराए जाएं।
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शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि दीपावली जैसे बड़े त्यौहार के समय प्रभावित परिवार सड़कों पर जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं। न तो कोई विस्थापन नीति अपनाई गई है और न ही पुनर्वास योजना। वर्षों से यहां रह रहे लोग नगर निगम को जल, बिजली और करों का भुगतान करते आए हैं, ऐसे में बिना पुनर्वास योजना के मकान तोड़ना अन्यायपूर्ण और मानवाधिकारों के विपरीत है।
कांग्रेस ने मांग की कि प्रशासन तत्काल प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास, भोजन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराए और यदि यह क्षेत्र अतिक्रमण में आता है तो उचित पुनर्वास एवं मुआवजा योजना बनाकर लोगों को बसाया जाए।