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Surajpur: मातम में बदलीं होली की खुशियां, बंद खदान में मिला किशोर का शव, जांच में जुटी पुलिस
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
Published by: अंबिकापुर ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2026 06:23 PM IST
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सार
होली के दिन एसईसीएल की बंद खदान की नीली झील में 15 वर्षीय किशोर विकास ठाकुर डूब गया। पुलिस ने गुरुवार, 5 मार्च को शव निकाला। घटना से बंद खदानों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI Generated
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विस्तार
सूरजपुर जिले के कोयलांचल की नगरी भटगांव में होली के दिन एक दर्दनाक हादसा होने की खबर है। यहां एसईसीएल की बंद पड़ी खदान की नीली झील में एक 15 वर्षीय किशोर की डूबने से मौत हो गई है। वहीं घटना की खबर पर भटगांव पुलिस, डीडीआरएफ और एसईसीएल के बचाव दल ने संयुक्त अभियान चलाकर शव को बाहर निकाला है।
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मिली जानकारी के अनुसार, एसईसीएल भटगांव के बी-टाइप कॉलोनी निवासी विकास ठाकुर उम्र (15 वर्ष) होली के दिन दोपहर करीब साढ़े तीन बजे घर से बिना किसी को बताए घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक घर वापस नहीं लौटा। परिजनों ने जब उसके मोबाइल पर फोन लगाया तो घंटी जा रही थी, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। जिससे घरवाले काफी देर तक खोजबीन करते रहे। लेकिन मृतक से संपर्क नहीं होने पर परिजनों ने घटना की सूचना भटगांव पुलिस को दी।
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वहीं पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर टीम की मदद से किशोर के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कराई। जिससे लोकेशन एसईसीएल की बंद खदान की नीली झील के पास मिली। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो झील के किनारे किशोर के कपड़े पड़े मिले। झील में देखने पर पानी के भीतर एक शव तैरता हुआ दिखाई दिया। लेकिन झील काफी गहरी होने व रात हो जाने के कारण उसी समय शव को नहीं निकाल सकी। टीम बैरंग वापस लौट गई।
वहीं आज गुरुवार की सुबह पुनः पुलिस टीम मौके पर पहुंची। सूरजपुर डीडीआरएफ एवं एसईसीएल के बचाव दल के संयुक्त प्रयास से करीब सुबह 11 बजे किशोर का शव झील से बाहर निकाला जा सका। प्रथम दृष्टया में आशंका जताई जा रही है कि किशोर दोस्तों के साथ नहाने के लिए झील तक गया होगा। गहरे पानी में चले जाने के कारण उसकी डूबने से मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भटगांव अस्पताल भेज दिया है। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।
चाट-फुल्की की शॉप पर करता था हेल्पर का काम
मृतक किशोर अपनी मां के साथ अकेला नगर पंचायत भटगांव के वार्ड क्रमांक 15 में रहता करता था। वहीं बड़ा भाई अंबिकापुर स्थित में मेण्ड्राकला में रहकर हजामत बनाने का काम करता है। वहीं विकास जीविकोपार्जन के लिए चाट-फुल्की की दुकान में हेल्पर का काम किया करता था।
बंद खदानों की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि एसईसीएल की बंद पड़ी खदानों में न तो घेराबंदी है और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था। कोयला खनन के बाद पानी भर जाने से ये गड्ढे गहरी झील का रूप ले चुके हैं, जिससे अक्सर हादसे की आशंका बनी रहती है। लोगों ने बंद खदानों में सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है।