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अंबिकापुर: 'लखपति दीदी' योजना से महिलाओं को मिली नई पहचान और आजीविका, सरकार भी कर रही है मदद

एएनआई, अम्बिकापुर Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 08 Apr 2026 04:53 PM IST
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सार

अंबिकापुर के ‘आशा बिहान बाजार’ में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत महिलाएं सफलतापूर्वक दुकानें चला रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Lakhpati Didi Scheme Gives Women a New Identity and Livelihood Government Also Providing Assistance in Ambikap
आशा बिहान बाजार - फोटो : ANI
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विस्तार

अंबिकापुर के ‘आशा बिहान बाजार’ में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत महिलाएं सफलतापूर्वक दुकानें चला रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन दुकानों के माध्यम से महिलाएं अपने जैविक उत्पादों को बाजार तक पहुंचा रही हैं।

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आशा बिहान बाजार की संचालक आशा देवी ने बताया कि उनके समूह का नाम ‘जय मां अम्बे’ है। इस समूह में कुल दस सदस्य शामिल हैं। ‘लखपति दीदी’ योजना के अंतर्गत आशा बिहान बाजार में यह नई दुकान खोली गई है। समूह द्वारा बेचे जा रहे सभी उत्पाद पूरी तरह से जैविक हैं।
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समूह की महिलाओं ने अपने गांव में मिलकर यह संगठन बनाया था। वे पहले छोटे-मोटे व्यवसाय करती थीं। उन्हें सरकार की ओर से सब्सिडी भी प्राप्त हुई है। आशा देवी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को उनकी आजीविका कमाने में सहायता के लिए धन्यवाद दिया।


लखपति दीदी योजना का प्रभाव
‘लखपति दीदी’ योजना ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में मदद करती है। इसके तहत उन्हें व्यवसाय शुरू करने और चलाने के लिए आवश्यक सहायता मिलती है। अंबिकापुर की महिलाएं इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं। यह पहल अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

जैविक उत्पादों से आत्मनिर्भरता
‘जय मां अम्बे’ समूह की महिलाएं मुख्य रूप से जैविक उत्पादों का विक्रय करती हैं। जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग उन्हें अच्छा मुनाफा कमाने में मदद कर रही है। यह न केवल उनकी आय बढ़ा रहा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है। समूह को मिली सब्सिडी ने उनके व्यवसाय को और मजबूत किया है। इस प्रकार, महिलाएं अपनी मेहनत और सरकारी सहयोग से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

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