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Balod News: रिजेक्ट धान के नाम पर 11.40 लाख का गबन, बीज निगम की जिला प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस

अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: बालोद ब्यूरो Updated Sat, 14 Feb 2026 10:43 AM IST
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सार

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बीज प्रक्रिया केंद्र की जिला प्रबंधक माधुरी बाला को 'कारण बताओ नोटिस' थमा दिया है। जांच में पाया गया कि जिस धान को लैब टेस्टिंग में फेल (रिजेक्ट) कर दिया गया था, उसी धान के बदले किसान को आनन-फानन में लाखों का भुगतान कर दिया गया

Embezzlement of Rs 11.40 lakh in the name of rejected paddy
बालोद कलेक्टर का बड़ा एक्शन: रिजेक्ट धान के नाम पर 11.40 लाख का गबन, बीज निगम की जिला प्रबंधक क
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विस्तार

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में धान खरीदी के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। बीज प्रक्रिया केंद्र झलमला में अधिकारियों और किसान की कथित साठगांठ से सरकारी खजाने को 11 लाख 40 हजार रुपये की चपत लगाने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू 'अमानक' धान पर भुगतान करना और एक ही जमीन से असंभव पैदावार दिखाना है।

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प्रशासनिक ने जारी किया नोटिस
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बीज प्रक्रिया केंद्र की जिला प्रबंधक माधुरी बाला को 'कारण बताओ नोटिस' थमा दिया है। जांच में पाया गया कि जिस धान को लैब टेस्टिंग में फेल (रिजेक्ट) कर दिया गया था, उसी धान के बदले किसान को आनन-फानन में लाखों का भुगतान कर दिया गया, फसल फर्जीवाड़े की परतें तब खुलीं जब उत्पादकता के आंकड़ों पर गौर किया गया
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असंभव आंकड़े जो दर्शाए गए
जहां जिले का औसत उत्पादन 20-25 क्विंटल है, वहीं ग्राम खपराभाट के किसान सोहन लाल कश्यप के नाम पर 33.76 क्विंटल प्रति एकड़ की खरीदी दिखाई गई। वहीं किसान का रकबा बीज निगम और देवरी धान खरीदी केंद्र, दोनों पोर्टल्स पर रजिस्टर्ड पाया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

प्रकरण की सबसे संदिग्ध बात यह रही कि जैसे ही मामले की शिकायत हुई और जांच शुरू हुई, विभाग ने तुरंत किसान के बैंक खाते से 11,40,200 रुपये की पूरी राशि वापस निकाल ली। यह कार्रवाई खुद-ब-खुद प्रमाणित करती है कि भुगतान में बड़ी गड़बड़ी हुई थी।

जांच दल की रिपोर्ट के अनुसार, 10 दिसंबर को किसान ने 1263 बोरी धान भेजी थी, जिसमें से 909 बोरी अमानक पाई गई। नियमतः यह धान किसान को वापस मिलना था, लेकिन आरोप है कि इसे कागजों में हेरफेर कर दूसरे टोकन के जरिए सरकारी सिस्टम में ही खपा दिया गया।

इस गंभीर अनियमितता पर जिला प्रबंधक माधुरी बाला ने ऑन-कैमरा बयान देने से बचते हुए केवल इतना कहा कि वे पोर्टल की रिपोर्ट्स के आधार पर अपना जवाब तैयार कर रही हैं। फिलहाल, जिला प्रशासन इस 'सफेदपोश' धांधली की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है, जिससे कई और बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद है।

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