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बीजापुर: केंद्र सरकार पर कांग्रेस का आरोप, मनरेगा के नियमों में बदलाव से मजदूरों का छीना हक
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:55 PM IST
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सार
बीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया।
कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
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गरीबों के हक पर डाका, ठेकेदारों को बढ़ावा
सुराना ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा के तहत तय न्यूनतम मजदूरी की गारंटी खत्म कर दी है। पहले हर साल मजदूरी बढ़ती थी और साल भर काम उपलब्ध रहता था, जिससे परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलती थी। अब मजदूरी मनमाने ढंग से तय होगी और न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी नहीं होगी। फसल कटाई के मौसम में काम नहीं मिलेगा, जिससे मजदूरों की मोलभाव करने की ताकत कम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायतों की शक्तियां छीनकर ठेकेदारों को दे दी गई हैं। पहले ग्राम पंचायतें विकास कार्यों की योजना बनाती थीं, लेकिन अब सभी निर्णय दिल्ली से होंगे और ग्राम पंचायतें केवल आदेश लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएंगी।
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राज्यों पर आर्थिक बोझ, बजट में कटौती
कांग्रेस नेता ने बताया कि केंद्र सरकार अब मनरेगा मजदूरी का केवल 60% भुगतान करेगी, जबकि 40% राज्य सरकारों को वहन करना होगा। इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और वे खर्च बचाने के लिए काम देना बंद कर सकते हैं। सुराना ने कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से मजदूरों की जीवनरेखा रही है और इसके तहत करोड़ों परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ है। विभिन्न अध्ययनों में इसे सफल योजना बताया गया है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि पिछले 11 वर्षों में मजदूरी में नाममात्र की वृद्धि हुई है और पिछले तीन वर्षों से बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। भुगतान में देरी के कारण वार्षिक बजट का लगभग 20% हिस्सा पिछले बकाये चुकाने में चला जाता है।
डिजिटल सत्यापन से छिन रहा काम का अधिकार
सुराना ने नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) को अनिवार्य करने को मजदूरों के काम के अधिकार और मजदूरी छिनने का एक और तरीका बताया। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से 2 करोड़ मजदूरों का अधिकार समाप्त हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन नए कानूनों से बेरोजगारी बढ़ेगी, मजदूरों का शोषण होगा, शहरों की ओर पलायन बढ़ेगा और पंचायतों की शक्तियां समाप्त हो जाएंगी। कांग्रेस नेता ने सरकार से काम, मजदूरी और जवाबदेही की गारंटी देने, मनरेगा में किए गए बदलावों को वापस लेने, काम के संवैधानिक अधिकार की बहाली करने और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रति दिन करने की मांग की।