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मिशन 2026 निर्णायक मोड़ पर: बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, 14.06 करोड़ की ऐतिहासिक बरामदगी

अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: बीजापुर ब्यूरो Updated Tue, 31 Mar 2026 10:23 PM IST
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सार

बीजापुर में मिशन 2026 के तहत 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की, जिनमें 12 महिलाएं शामिल हैं। इस दौरान 14.06 करोड़ रुपये की बड़ी बरामदगी हुई, जिसमें नकद, सोना और 93 घातक हथियार जब्त किए गए।

Surrender of 25 Maoist cadres in Bijapur
बीजापुर में 25 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बीजापुर में वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन के लिए चल रहा मिशन 2026 अब निर्णायक मुकाम पर पहुंच गया है। पुणे मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत पच्चीस माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। इन आत्मसमर्पित कैडरों में बारह महिलाएं भी शामिल हैं। इन सभी पर कुल एक करोड़ सैंतालीस लाख रुपये का इनाम घोषित था।
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इस आत्मसमर्पण के साथ ही माओवादी इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक बरामदगी भी सामने आई है। कुल चौदह करोड़ छह लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसमें दो करोड़ नब्बे लाख रुपये नकद और ग्यारह करोड़ सोलह लाख रुपये मूल्य का सात दशमलव दो शून्य किलोग्राम सोना शामिल है। इसके अतिरिक्त, एलएमजी, एके-सैंतालीस, एसएलआर, इंसास सहित कुल तिरानवे घातक हथियार भी बरामद किए गए हैं।
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जिला बीजापुर में एक जनवरी दो हजार चौबीस से इकतीस मार्च दो हजार छब्बीस तक कुल एक हजार तीन माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है। इससे पहले पांच करोड़ सैंतीस लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। इस प्रकार अब तक कुल उन्नीस करोड़ तैंतालीस लाख रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इसमें छह करोड़ तिरसठ लाख रुपये नकद और बारह करोड़ अस्सी लाख रुपये मूल्य का आठ दशमलव दो शून्य किलोग्राम सोना शामिल है।

आत्मसमर्पण की विस्तृत जानकारी
आत्मसमर्पण करने वालों में कई वरिष्ठ माओवादी नेता भी शामिल हैं। इनमें सीवायपीसी मंगल कोरसा उर्फ मोटू और सीवायपीसी आकाश उर्फ फागु उईका प्रमुख हैं। डीवीसीएम शंकर मुचाकी, एसीएम राजू रैयाम उर्फ मुन्ना और एसीएम पाले कुरसम जैसे नाम भी हैं। इन सभी ने संगठन की निरर्थकता को स्वीकार करते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी थे। इनमें दो सीवायपीसी, एक डीवीसीएम, सात बटालियन/कंपनी सदस्य, चार पीपीसीएम, छह एसीएम और पांच पार्टी सदस्य शामिल हैं। यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियानों की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

सुरक्षा बलों की भूमिका और पुनर्वास
इस सफलता में डीआरजी, जिला बल, एसटीएफ, कोबरा और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की अहम भूमिका रही है। सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में लगातार सक्रियता और विश्वास निर्माण का काम किया। उनके संवेदनशील व्यवहार ने माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित कैडरों को सहायता मिलेगी। उन्हें आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

स्थायी शांति की अपील और प्रतिबद्धता
बस्तर रेंज पुलिस ने शेष माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें। शासन उनकी सुरक्षा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह पहल बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगी।

बीजापुर न्यूज

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