CG Naxalites Surrender: बीजापुर में 46 लाख के इनामी 12 माओवादी ने किया आत्मसमर्पण, आठ महिला नक्सली शामिल
CG Naxalites Surrender: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 46 लाख रुपये के इनामी 12 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। ‘पूना मर्जेम’ अभियान और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडर करने वाले नक्सलियों में आठ महिलाएं भी शामिल हैं। सभी को सहायता राशि देकर पुनर्वास किया जाएगा।
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CG Naxalites Surrender: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कुल 46 लाख रुपये के इनामी 12 नक्सलियों ने गुरुवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि इनमें आठ महिलाएं भी शामिल हैं। ये सभी माओवादी संगठन के ‘साउथ सब जोनल ब्यूरो’ से जुड़े थे। इन्होंने बस्तर पुलिस की ‘पूना मर्जेम’ (पुनर्वास से सामाजिक पुनर्स्थापन) पहल के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।
इनमें सोमडू मड़काम (42) डिविजनल कमेटी मेंबर और कटेकल्याण एरिया कमेटी प्रभारी, हुंगी कुंजाम (19) और पायकी कुंजाम (22) शामिल हैं, जो अलग अलग यूनिट के पार्टी मेंबर थे। इन तीनों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा तीन अन्य नक्सलियों पर पांच-पांच लाख रुपये, एक पर दो लाख रुपये और पांच पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने एक एके 47 रायफल, दो सेल्फ लोडिंग रायफल (एसएलआर), 250 जिलेटिन स्टिक, 400 डेटोनेटर, बारूद से भरा एक प्लास्टिक ड्रम और कॉर्डेक्स वायर का एक बंडल भी पुलिस को सौंपा। अधिकारी ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल 5- 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी और सरकार की नीति के तहत उनका पुनर्वास किया जाएगा।
2024 से अब तक 888 नक्सलियों ने मुख्यधारा में की वापसी
पुलिस के अनुसार, बीजापुर जिले में एक जनवरी 2024 से अब तक 888 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है, जबकि 1,163 गिरफ्तार हुए और अलग अलग मुठभेड़ों में 231 मारे गए। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि माओवादी संगठन तेजी से अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित होने, सड़क संपर्क बेहतर होने, लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुंच से संगठन का आधार क्षेत्र लगातार सिमट रहा है।
उन्होंने शेष नक्सली कैडरों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता केवल विनाश, पीड़ा और अंधकार की ओर ले जाता है, जबकि ‘पूना मर्जेम’ अभियान शांति, सम्मानजनक जीवन और सकारात्मक भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। सुरक्षित भविष्य और नए जीवन के निर्माण की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है।
इस आत्मसमर्पण के साथ ही इस वर्ष अब तक राज्य में 220 से अधिक नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। 15 जनवरी को बीजापुर जिले में ही 52 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि पिछले वर्ष राज्य में 1,500 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया था। केंद्र सरकार ने इस वर्ष 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया है।
