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Bijapur News: सुदूर गांवों में पहुंचे विधायक विक्रम मंडावी, सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 12:23 PM IST
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सार
बीजापुर के सुदूर पामेड़ क्षेत्र में विधायक विक्रम मंडावी ने गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। राजस्व पट्टा, बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और राशन व्यवस्था जैसी समस्याएं उठीं।
विधायक ने पामेड़ के सुदूर गांवों में लगाया जनसंवाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के सबसे सुदूर और उपेक्षित अंचलों में से एक बीजापुर जिले के पामेड़ क्षेत्र में बीते गुरुवार और शुक्रवार को एक असाधारण दृश्य देखने को मिला। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी जब छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा से सटे इन दुर्गम गांवों में पहुंचे, तो ग्रामीणों की आंखों में एक नई उम्मीद की चमक थी। फूल-मालाओं और जयकारों के बीच हुआ उनका स्वागत यह बता रहा था कि यहां के लोग लंबे समय से किसी जनप्रतिनिधि की प्रतीक्षा में थे।
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पामेड़ क्षेत्र, जहां छत्तीसगढ़ की सीमा तेलंगाना से मिलती है, आदिवासी बहुल, नक्सल प्रभावित और विकास की दृष्टि से सर्वाधिक वंचित इलाकों में गिना जाता है। तर्रेम, चिन्नागेल्लूर, गुंडम, छुटवाई, कोंडापल्ली, वाटेगुड़ा, काउरगट्टा, जीड़पल्ली, धरमारम, टेकलेर, पामेड़, भीमारम, पुजारी कांकेर, कमलापुर, मारूडबाका, गूंजेपरती, नंबी, गलगम और नड़पल्ली जैसे गांव आज भी बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। इन गांवों में विधायक मंडावी का यह दौरा महज एक राजनीतिक भ्रमण नहीं, बल्कि जनसंवाद बन गया।
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राजस्व पट्टा का वितरण, बिजली, शुद्ध पेयजल, सड़कें, अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं, विद्यालय भवन, शिक्षक, राशन दुकानें और राशन के नियमित वितरण की व्यवस्था जैसी मांगें ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी से कीं।
विधायक विक्रम मंडावी ने प्रत्येक गांव में धैर्यपूर्वक ग्रामीणों की बातें सुनीं, उनकी समस्याओं का जायजा लिया और ग्रामीणों की मांग के अनुरूप विधायक निधि से प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक पानी टैंकर, खेल सामग्री और देवगुड़ी निर्माण की स्वीकृति तत्काल प्रदान की।
विधायक ने कहा कि पामेड़ क्षेत्र भले ही प्रदेश का अंतिम छोर हो, लेकिन हमारी प्राथमिकताओं में यह पहले पायदान पर है। यहां के लोगों की मांगें उनका संवैधानिक हक है। वनाधिकार पट्टा, सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल और राशन, ये सब मिलना चाहिए और मिलेगा। छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर इन समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का भरोसा ग्रामीणों को दिया गया।
