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25 साल पूरे होने पर बिलासपुर हाईकोर्ट में भव्य समारोह: राज्यपाल डेका, CM साय और सुप्रीम कोर्ट के जज हुए शामिल
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 27 Sep 2025 02:57 PM IST
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सार
बिलासपुर हाईकोर्ट की 25वीं रजत जयंती का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। इस अवसर पर न्याय और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
25 साल पूरे होने पर बिलासपुर हाईकोर्ट में भव्य समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिलासपुर हाईकोर्ट की 25वीं रजत जयंती का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। इस अवसर पर न्याय और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह में राज्यपाल महामहिम रेमन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी, जस्टिस प्रशांत मिश्रा, तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी. सैम कोशी और पूर्व जज मनींद्र मोहन श्रीवास्तव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में हाईकोर्ट ने पेंडेंसी कम करने और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने हिंदी में अपने संबोधन में कहा कि मैं छत्तीसगढ़ आया हूं तो हिंदी में ही बोलूंगा। मैं मध्यप्रदेश का हूं और छत्तीसगढ़ से मेरा आत्मीय जुड़ाव है। बेंच और बार एक रथ के दो पहिए हैं, और कर्म ही सच्चा धर्म है। न्यायालय इमारतों से नहीं, बल्कि लोगों को मिलने वाले न्याय से पहचाना जाएगा। आने वाले 25 साल सबकी सहभागिता से तय होंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को रजत जयंती की शुभकामनाएं दी और कहा कि बिलासपुर अब न्यायधानी के नाम से पहचाना जा रहा है। यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की देन है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य बनाकर नई पहचान दी, और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहचान और मजबूत हो रही है।
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चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में हाईकोर्ट ने पेंडेंसी कम करने और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने हिंदी में अपने संबोधन में कहा कि मैं छत्तीसगढ़ आया हूं तो हिंदी में ही बोलूंगा। मैं मध्यप्रदेश का हूं और छत्तीसगढ़ से मेरा आत्मीय जुड़ाव है। बेंच और बार एक रथ के दो पहिए हैं, और कर्म ही सच्चा धर्म है। न्यायालय इमारतों से नहीं, बल्कि लोगों को मिलने वाले न्याय से पहचाना जाएगा। आने वाले 25 साल सबकी सहभागिता से तय होंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को रजत जयंती की शुभकामनाएं दी और कहा कि बिलासपुर अब न्यायधानी के नाम से पहचाना जा रहा है। यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की देन है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य बनाकर नई पहचान दी, और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहचान और मजबूत हो रही है।