सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   CG High Court acquits all seven accused in Avinash Pandey murder case

CG High Court: बहुचर्चित अविनाश पांडेय हत्या मामले में सभी सात आरोपी बरी, विरोधाभासी बयान और सबूतों की रही कमी

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 24 Oct 2025 10:06 AM IST
विज्ञापन
सार

महासमुंद जिले के 2013 के बहुचर्चित अविनाश पांडेय हत्या मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उम्रकैद के फैसले को पलटते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अभियोजन के मुख्य गवाहों के विरोधाभासी बयानों, सड़क दुर्घटना से मेल खाती चोटों और सबूतों की कमी को आधार बनाते हुए संदेह का लाभ देते हुए फैसला सुनाया।

CG High Court acquits all seven accused in Avinash Pandey murder case
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : highcourt.cg.gov.in
विज्ञापन

विस्तार

महासमुंद जिले के बहुचर्चित अविनाश पांडेय हत्या मामले में हाईकोर्ट ने  सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा है। मामले में जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बैंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। 

Trending Videos


दरअसल, मामला जून 2013 का है, जब एफसीआई गोदाम, बागबहरा के पास अविनाश पांडेय गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। पुलिस ने शुरू में इसे सड़क दुर्घटना बताया, लेकिन बाद में हत्या का मामला दर्ज कर सात आरोपियों विश्वजीत राय, सनी राय, संटू राय, रवि चंद्राकर, रवि खरे, मनीष सोनी और ढाबा कर्मचारियों पर मुकदमा चलाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सत्र न्यायालय ने इन्हें दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसको लेकर आरोपियों ने अपील की, अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह मुकेश शर्मा का बयान विरोधाभासी और अविश्वसनीय है। 

कोर्ट ने कहा कि वह खुद घटना स्थल से भाग गया था, कई दिन बाद बयान दिया और मृतक का मोबाइल फोन अपने पास रखे रहा। पिता और मामा सहित अन्य गवाहों ने भी घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को समय पर कुछ नहीं बताया।

डॉक्टरों की रिपोर्ट में चोटें सड़क हादसे से मेल खाती पाई गईं और किसी हमले के ठोस सबूत नहीं मिले। अदालत ने कहा कि अभियोजन की कहानी संदेह से परे साबित नहीं होती और कथित मौखिक या लिखित ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ भी कानूनन भरोसेमंद नहीं है। इसलिए संदेह का लाभ देते हुए सभी अपीलकर्ताओं को बरी किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed