सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   Demand to give Marathi language the status of linguistic minority in Bilaspur

बिलासपुर: मराठी भाषा को भाषाई अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग, हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 08 Jul 2025 06:32 PM IST
विज्ञापन
सार

छत्तीसगढ़ में मराठी भाषा को भाषाई अल्पसंख्यक का दर्जा देने के निर्देश देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी।

Demand to give Marathi language the status of linguistic minority in Bilaspur
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

छत्तीसगढ़ में मराठी भाषा को भाषाई अल्पसंख्यक का दर्जा देने के निर्देश देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता के 27 नवंबर 2024 को दिए गए अभ्यावेदन पर विचार कर तीन माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। बिलासपुर के तिलक नगर में रहने वाले डॉ. सचिन काले ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई थी। उन्होंने अपने मामले की खुद पैरवी करते हुए मांग की कि अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी मराठी भाषी समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाना चाहिए। 

Trending Videos


याचिका में केंद्र सरकार की अधिसूचना का हवाला देते हुए तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को अधिकार देते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के टीएमए पाई फाउंडेशन बनाम कर्नाटक राज्य के फैसले का हवाला देते हुए बताया गया, कि अल्पसंख्यक दर्जे का निर्धारण राज्य स्तर पर होना चाहिए, न कि पूरे देश के संदर्भ में। कई राज्यों में भाषाई आधार पर अल्पसंख्यक दर्जा देने की जानकारी दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में बताया गया, कि कर्नाटक ने उर्दू, मराठी, हिंदी और तुलु को राज्य में अल्पसंख्यक भाषा के रूप में अधिसूचित किया है। तमिलनाडु ने तेलुगु, कन्नड़, मलयालम उर्दू को राज्य में अल्पसंख्यक भाषा घोषित किया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश ने भी उर्दू, मराठी और सिंधी को अल्पसंख्यक भाषा घोषित किया है। वहीं, महाराष्ट्र में यहूदियों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित करने की भी जानकारी दी गई। मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विचार कर राज्य सरकार को तीन माह के भीतर निर्णय लेने कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed