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Bilaspur: 'मदकू द्वीप में विकसित किए जा रहे इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट को निगरानी में रखें', हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: आकाश दुबे
Updated Tue, 07 Oct 2025 09:50 PM IST
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सार
कोर्ट ने कहा कि मुंगेली के डीएफओ परियोजना की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखें। डीपीआर तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के दौरान सतत विकास और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े सभी सुझावों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।
बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट ने मदकू द्वीप क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट की प्रगति पर संतोष जाहिर करते हुए इसे निगरानी में रखने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि परियोजना के दौरान पर्यावरणीय संतुलन, जैव-विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। यह मामला स्वतः संज्ञान जनहित याचिका के रूप में दर्ज है, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की डीबी में चल रहा है। मामले की अगली निगरानी सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।
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मामले को लेकर पिछली सुनवाई 26 अगस्त के अनुपालन में मुंगेली के डीएफओ ने अपना व्यक्तिगत हलफनामा न्यायालय में प्रस्तुत किया। जिसमें बताया गया कि विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों ने 23 जुलाई 2025 को मदकू द्वीप का स्थल निरीक्षण किया था। निरीक्षण का उद्देश्य परियोजना की पूर्व व्यवहार्यता का मूल्यांकन करना और सतत विकास के उपायों की रूपरेखा तय करना था। इसके बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने क्षेत्र का दौरा कर जैव-विविधता सर्वेक्षण और स्कोप सर्वे किया, ताकि परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा सके। डीपीआर तैयार करने के लिए निविदा की शर्तें तय कर ली गई हैं और 25 सितंबर 2025 को जेम पोर्टल पर निविदा जारी की गई है।
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कोर्ट ने कहा कि मुंगेली के डीएफओ परियोजना की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखें। डीपीआर तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के दौरान सतत विकास और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े सभी सुझावों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। गठित स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन समिति को हर माह स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) डीएफओ को सौंपनी होगी, जिसे अगली सुनवाई के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।