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बिलासपुर: हाईकोर्ट ने आरक्षक भर्ती पर लगाई रोक, शारीरिक दक्षता परीक्षा में हेरफेर का आरोप, दो सप्ताह में जवाब

अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 28 Jan 2026 08:00 PM IST
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सार

छत्तीसगढ़ में 6,000 पदों पर चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

High Court has stayed the constable recruitment process citing allegations of manipulation in the physical eff
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छत्तीसगढ़ में 6,000 पदों पर चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुलिस विभाग को अगले दो हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, और मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की है। इस स्थगन आदेश के कारण पुलिस विभाग अगली सुनवाई तक किसी भी चयनित उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र जारी नहीं कर सकेगा।

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शारीरिक दक्षता परीक्षा में हेरफेर का आरोप
याचिकाकर्ताओं के वकील मतीन सिद्दिकी ने कोर्ट को बताया कि शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। उन्होंने बिलासपुर एसएसपी और चयन समिति के अध्यक्ष द्वारा 19 दिसंबर 2024 को पुलिस मुख्यालय रायपुर को लिखे गए एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें फिजिकल टेस्ट के दौरान पाई गई गड़बड़ियों की आधिकारिक जानकारी दी गई थी। चूंकि पूरे प्रदेश के लिए भर्ती एक ही सेंट्रलाइज्ड विज्ञापन के माध्यम से हो रही है और फिजिकल टेस्ट कराने वाली आउटसोर्स कंपनी भी एक ही है, इसलिए याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई है कि बिलासपुर जैसे अन्य केंद्रों पर भी इसी तरह की धांधली हुई हो सकती है।
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नियुक्तियों से जांच प्रभावित होने की आशंका
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि कुल 6,000 पदों में से अब तक लगभग 2,500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि इन नियुक्तियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, शासन की ओर से पेश हुए वकील ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि शिकायतें केवल एक केंद्र तक सीमित हैं। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने अंतिम फैसला आने तक या अगली सुनवाई तक नए नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है।

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