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Bilaspur: विश्व हृदय दिवस पर बिलासपुर में वायरलेस हॉल्टर मॉनिटरिंग की सुविधा शुरू, मरीजों को होगी कई सहूलियतें
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: आकाश दुबे
Updated Sun, 28 Sep 2025 10:12 PM IST
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सार
पुराने हॉल्टर मॉनिटरिंग सिस्टम में केवल 24 अथवा 48 घंटे की ही मॉनिटरिंग किए जाने का प्रावधान था। साथ ही पुराने हॉल्टर मॉनिटर को पानी से बचने के लिए मरीज को पूरी जांच के दौरान बिना नहाए रहना होता था।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
आज विश्व हृदय दिवस पर अपोलो हॉस्पिटल में हृदय रोगियों के लिए वायरलेस हॉल्टर मॉनिटरिंग सुविधा की शुरुआत की गई है। मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत विकसित यह अत्याधुनिक आविष्कार कार्डियक मॉनिटरिंग को पूरी तरह नया रूप दे रहा है।
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परंपरागत हॉल्टर मॉनिटर की तुलना में यह नवीन तकनीक अत्यधिक उपयोगी एवं सुविधाजनक है। पुराने हॉल्टर मॉनिटरिंग सिस्टम में मरीज के शरीर के साथ एक उपकरण जो की विभिन्न तारों के माध्यम से हृदय की 24 घंटे की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करता था, जिसे बाद में अस्पताल जाकर पुनः कंप्यूटर में डाउनलोड करने के उपरांत रिपोर्ट तैयार की जाती थी। पुराने हॉल्टर मॉनिटरिंग सिस्टम में केवल 24 अथवा 48 घंटे की ही मॉनिटरिंग किए जाने का प्रावधान था। साथ ही पुराने हॉल्टर मॉनिटर को पानी से बचने के लिए मरीज को पूरी जांच के दौरान बिना नहाए रहना होता था, परंतु इस नए हॉल्टर मॉनिटरिंग डिवाइस के साथ मरीज को पूरी तरह अपनी दिनचर्या पूरी करने की आजादी है, क्योंकि यह उपकरण पूरी तरह वायर-फ्री, हल्का और डिस्पोजेबल वायरलेस है। इसलिए मरीज पूरी तरह से अपने व्यावसायिक एवं दैनिक दिनचर्या जैसे चलना, नहाना, काम करना या सोने को पूरा करने के लिए स्वतंत्र होता है।
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इस नए हॉल्टर मॉनिटरिंग सिस्टम में 3 दिन एवं 7 दिनों तक मरीज के हृदय की गतिविधि की जांच एवं रिकॉर्डिंग की जा सकती है। यह नया अत्याधुनिक उपकरण इंटरनेट के माध्यम से हृदय की सारी गतिविधियां, अस्पताल या चिकित्सक की मेल आईडी पर भेज देता है, अर्थात जांच उपरांत मरीज को अस्पताल में जाकर उपकरण की रिकॉर्डिंग डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस नए हॉल्टर मॉनिटरिंग के माध्यम से डॉक्टरों को प्राप्त होने वाली हृदय की गतिविधियां सटीक और विस्तृत रिपोर्ट्स के रूप में प्राप्त होती हैं। जिससे दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
लकवाग्रस्त मरीजों के लिए भी राहतभरा समाधान
वेबकार्डियो उन मरीजों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है जो लकवाग्रस्त (पैरालाइज़्ड) हैं या चलने-फिरने में असमर्थ हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उन्हें अनावश्यक यात्रा की परेशानी से राहत मिलती है।
"मेक इन इंडिया विजन” के अनुरूप, वेबकार्डियो को गर्व के साथ भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। आज 2 लाख से अधिक मरीजों द्वारा उपयोग में लाया जा चुका वेबकार्डियो, भरोसे, सटीकता और मरीजों की सुविधा का प्रतीक बन चुका है। अपोलो हॉस्पिटल समूह में विगत दो वर्षों से बहुत सारे मरीज ने इस नए उपकरण का लाभ लिया है एवं अच्छे परिणाम के आधार पर उचित उपचार प्राप्त किया है। डॉक्टर इसकी तकनीकी गुणवत्ता की सराहना करते हैं, जबकि मरीज इसकी सहजता और स्वतंत्रता को अपनाते हैं।