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EXCLUSIVE: अजब-गजब है ये 'सोने की माला'; अतिथियों को पहनाकर सुर्खियों में थे भूपेश बघेल, जानें इसकी खासियत

Lalit Kumar Singh ललित कुमार सिंह
Updated Tue, 27 Jan 2026 06:31 PM IST
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सार

Biran Mala, CG Tribal: पूरे विश्व में छत्तीसगढ़ में ही एक ऐसी माला बनती है, जिसे राज्य में 'सोने की माला' कहते हैं।

CG News: This is truly amazing golden necklace, Know here Biran Mala specialty
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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iran Mala, CG Tribal: पूरे विश्व में छत्तीसगढ़ में ही एक ऐसी माला बनती है, जिसे राज्य में 'सोने की माला' कहते हैं। अजब-गजब तरीके से बनी इस माला को छत्तीसगढ़ी भाषा में 'बीरन माला' भी कहते हैं। आप इस सोने की माला की खासियत सुनकर चौंक जायेंगे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित 'रायपुर साहित्य महोत्सव 2026' में ये माला बिक्री के लिये लायी गई थी। अमर उजाला ने इस 'सोने की माला' की गहनता से जांच-पड़ताल की। इस दौरान इस माला को लेकर कई अहम जानकारी मिली।  
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अमर उजाला से खास चर्चा में कवर्धा जिले से रायपुर पहुंचे बैगा जनजाति समाज के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी राम मछिया ने कहा कि औषधीय गुणों से भरपूर धार्मिक पेड़ पारिजात के कोण के रेशे से रिंग का आकार देकर इस माला को तैयार करते हैं। एक-एक रिंग को आपस में गूंथकर इसे एक मीटर तक बनाया जाता है। एक विशेष प्रकार की घास जिसे सुताखर कहते हैं। उस घास से इसे बीना जाता है। उसके न मिलने पर मुआ के फूल के रेशे से भी इसे तैयार करते हैं। बैगा समुदाय में होने वाली शादी में अतिथियों को ये माला पहनाकर उनका सम्मान करते हैं। 






सोने की माला पहनाने पर ट्रोलिंग हुए थे भूपेश बघेल
24 से 26 फरवरी 2023 में रायपुर में हुए कांग्रेस के 85वें महाधिवेशन में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को ये माला पहनाकर सम्मानित किया था। उस दौरान 'सोने की माला' पहनाने को लेकर सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हुए थे। असली सोने की माला को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर वीडियो वायरल हुआ था। कई सोशल मीडिया यूजर्स आरोप लगाये थे कि बघेल ने कांग्रेस नेताओं का स्वागत सोने की माला पहनाकर किया। वहीं बीजेपी ने सोने की माला कहकर राजनीतिक मुद्दा बनाया था। इस वीडियो में भूपेश बघेल कांग्रेस नेताओं को पीले रंग की माला पहनाकर उनका अभिवादन करते दिखे थे। 






जानें इस माला की खासियत
यह माला कवर्धा जिले के बैगा आदिवासियों का विशेष श्रृंगार है, जो इन्हें और अधिक सुंदर बनाता है, जिसे केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी पहनते हैं। जिले के पंडरिया विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्र में इस तरह की माला बैगा आदिवासी परिवार के लोग बनाते हैं। वो इसे वर्षों  से बनाते आ रहे हैं। कवर्धा दौरे पर जाने वाले लोग इसे काफी पसंद करते हैं और इसे खरीदते भी हैं।







बैगा समजा में इसका विशेष महत्व है। ये माला बिरन घास से बनती है, इसलिए बैगाओं ने इसका नाम भी बिरन माला रखा है। दशहरा के दौरान आयोजित पारंपरिक नाच में भी इसे पहनते हैं। वर्तमान में इसकी मांग काफी बढ़ती जा रही है। एक माला को बनाने में तीन दिन लगते हैं। दो सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये में ये माला बिकता है। घासफूंस से बने इस माला को बैगा समाज में 'सोने की माला'भी कहते हैं। 

 
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