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CG News: सीजीपीएससी घोटाले में अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले की होगी जांच; ईडी सोनवानी से खुलवाएगी लेन-देन के राज

Sun, 26 Jul 2026 06:31 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Sun, 26 Jul 2026 06:31 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई ने दो साल पहले गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर अवैध लेन-देन किया गया था। 

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cgpsc chairman taman singh sonwani arrested, ED investigate money laundering case
टामन सिंह सोनवानी को कोर्ट में पेश करते पुलिसकर्मी - फोटो : Amar ujala digital

विस्तार

CGPSC Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अब छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में एंट्री हो गई है। ईडी ने जेल में बंद सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन और रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर टामन सिंह सोनवानी को फिर गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने सोनवानी को सात दिन की रिमांड पर ईडी को सौंप दिया है। 
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सीबीआई जांच के बाद अब ईडी इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पड़ताल करेगी। इस संबंध में उनसे सभी पहलुओं पर गहनता से पूछताछ करेगी। ऐसे में यह माना जा रहा है कि पूछताछ में भर्ती प्रक्रिया में पैसों के लेन-देन, अवैध कमाई और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सकता है। इस मामले में ईडी ने रायपुर के स्पेशल कोर्ट में सोनवानी की एक सप्ताह की रिमांड मांगी थी। इस केस में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ईडी की अर्जी को स्वीकार की। सोनवानी को सात दिन की रिमांड पर सौंपा है। 
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बता दें कि सोनवानी को सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई ने दो साल पहले गिरफ्तार किया था। उनके साथ ही बजरंग पॉवर एंड स्टील लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया था। आरोप है कि सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में जो अनियमितताएं हुईं हैं। प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथिततौर पर अवैध लेन-देन हुआ था।
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अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से होगी जांच
सीबीआई जांच के बाद अब ईडी इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करेगी। इस संबंध में एजेंसी सोनवानी से सभी पहलुओं पर गहन पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान भर्ती प्रक्रिया में हुए पैसों के लेन-देन, अवैध कमाई और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अहम खुलासे हो सकते हैं। इस मामले में ईडी ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट से सोनवानी की एक सप्ताह की रिमांड मांगी थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ईडी की अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें सात दिन की रिमांड पर सौंप दिया।

सीबीआई पहले ही कर चुकी है गिरफ्तारी
बता दें कि टामन सिंह सोनवानी को सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में सीबीआई ने दो साल पहले गिरफ्तार किया था। उनके साथ बजरंग पावर एंड स्टील लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि सीजीपीएससी भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई थीं। प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर अवैध लेन-देन किया गया था। अब ईडी इसी आर्थिक पहलू की गहन जांच कर रही है।

18 रिश्तेदारों को नौकरी लगवाई
इस केस में पूर्व में की गई सीबीआई जांच के अनुसार, सोनवानी के कार्यकाल में पीएससी परीक्षा भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कई करीबी रिश्तेदारों और कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों की नौकरी लगवाई है। जांच में पैसों के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं। 

सोनवानी ने घर पर सौंपे परीक्षा के पेपर
केंद्रीय एजेंसी सीबीआई के जांच के मुताबिक, सोनवानी ने परीक्षा के पेपर अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पॉवर एंड स्टील कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा। श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इस लीक पेपर से तैयारी की थी। रिजल्ट जारी होने के बाद दोनों डिप्टी कलेक्टर बने।

मामले में आरोप यह भी है कि अध्यक्ष सोनवानी के निर्देश पर परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने उद्योगपति श्रवण गोयल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। जिन्होंने आगे यह प्रश्नपत्र अपने बेटे और बहू को दिए। दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ है। दूसरी ओर सोनवानी के भतीजों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी पद पर हुआ है।

कोलकाता से रायपुर तक भाई-भतीजावाद का खेल!
इस मामले में प्रश्न पत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था। जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास सात सेट प्रश्न पत्र लेकर रायपुर आया था। उसने ये सभी पेपर आरती वासनिक को सौंपे थे। आरती प्रश्न पत्र को घर लेकर गई, जहां टामन और ललित के साथ मिलकर उनकी कॉपी तैयार की गई। इसके बाद पर्चों को दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए वापस भेज दिया गया था। 

सितंबर 2025 में हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में सीबीआई ने सितंबर 2025 में आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सचिव के बेटे व डिप्टी कलेक्टर सुमित ध्रुव, पूर्व अध्यक्ष की रिश्तेदार व डिप्टी कलेक्टर मिशा कोसले और जिला आबकारी अधिकारी दीपा आदिल शामिल हैं।

सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं।

इतने पदों पर हुई थी सीजीपीएससी परीक्षा
वर्ष 2021 में सीजीपीएससी परीक्षा हुई थी। कुल 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा हुई थी। इसके तहत प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को हुआ था। इसमें दो हजार 565 अभ्यर्थी पास हुए थे। इसके बाद 26 से 29 मई 2022 को आयोजित मेंस एग्जाम में 509 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे। साक्षात्कार के बाद 11 मई 2023 को चयनित 170 अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी की गई थी। 

 
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