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अवैध संबंध से जन्मे शिशु की हत्या का मामला: हाईकोर्ट ने महिला की अपील की खारिज, मां की सजा को रखा बरकरार
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 04 Jul 2025 12:55 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अवैध संबंध से जन्मे दो दिन के शिशु की हत्या कर शव फेंकने वाली महिला की अपील खारिज की। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय की उम्रकैद की सजा को मेडिकल साक्ष्य और स्वीकारोक्ति के आधार पर यथावत रखा।
बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सजा काट रही महिला की अपील खारिज कर दी। महिला ने अवैध संबंध से जन्मे बच्चे की हत्या कर शव खार में फेंक दिया था। इसी मामले में सत्र न्यायालय ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस बीडी गुरू की डीबी में हुई।
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रायपुर जिले में रहने वाले एक व्यक्ति ने 22 अक्तूबर 2018 को पुलिस को सूचना दी कि उसकी विधवा बहू ने एक अन्य शख्स के साथ मिलकर अपने बच्चे की हत्या कर दी। इसके बाद शव को फेंक दिया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शिशु के सिर और गले में चोट के निशान मिले। पुलिस ने जनवरी 2019 में अपराध दर्ज कर महिला एवं सह अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। विचारण न्यायालय ने सह आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं, महिला को 302 में आजीवन, 201 में पांच वर्ष और 318 में दो वर्ष कैद की सजा सुनाई।
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सजा के खिलाफ आरोपी महिला ने हाईकोर्ट में अपील की। अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अपीलकर्ता को वर्तमान मामले में झूठा फंसाया गया है। अपीलकर्ता के ससुर जिन्होंने लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी वह अपने बयान से पलट गए हैं और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। घटना 22/10/2018 को हुई थी और एफआईआर 17/01/2019 को दर्ज की गई थी, यानी तीन महीने से अधिक की देरी हुई। दर्ज कराई गई लिखित रिपोर्ट में तारीख नहीं है। मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इस आधार पर अपीलकर्ता को दोषमुक्त करने की मांग की गई थी।
मामले में बताया गया कि उसके समाज की बैठक हुई थी, जिसमें अपीलार्थी को भी बुलाया गया था। समाज के लोगों ने बच्चे के बारे में पूछताछ की थी, जिस पर उसने बताया कि उसके और सह-अभियुक्त के बीच संबंध होने के कारण बच्चा पैदा हुआ था, जब सह-अभियुक्त ने बच्चे को रखने के लिए कहा तो उसने लेने से इनकार कर दिया, इसलिए अपीलार्थी ने बच्चे की हत्या कर दी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने स्वयं अपने दो दिन के शिशु की हत्या करने के संबंध में गांव वालों के समक्ष स्वेच्छा से तथा बिना किसी प्रलोभन के, एक अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति की। इसकी पुष्टि चिकित्सा साक्ष्य व अन्य गवाहों के बयान के रूप में अन्य साक्ष्यों से भी हुई। कोर्ट ने अपील को खारिज कर सत्र न्यायालय के आदेश को यथावत रखा है।