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CG: सुशील आनंद शुक्ला बोले- अपने पूर्वजों के गुनाह पर पर्दा डालने के लिए बीजेपी ने मनाया विभाजन विभीषिका दिवस
Fri, 14 Aug 2026 11:59 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 14 Aug 2026 11:59 PM IST
सार
CG Politics: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बीजेपी के विभाजन विभीषिका दिवस पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका कार्यक्रम भाजपा का अपने पूर्वजों के गुनाह पर से पर्दा डालने के लिये मनाई।
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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
CG Politics: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बीजेपी के विभाजन विभीषिका दिवस पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका कार्यक्रम भाजपा का अपने पूर्वजों के गुनाह पर से पर्दा डालने के लिये मनाई। भारत विभाजन के गुनहागार हिंदू महासभा, आरएसएस और मुस्लिम लीग जैसी साम्प्रदायिक ताकतें अंग्रेजो की फूट डालो राज करो नीति में सहयोग देती रही हैं।
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उन्होंने कहा कि भाजपा अपने पूर्वजों के गुनाहों को महात्मा गांधी और पंडित नेहरू पर मढ़ने की शुरू से साजिश करती रही है। अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति में सहयोगी की भूमिका निभाने वाले मुस्लिम लीग के साथ हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के गठजोड़ ने आजादी की लड़ाई में गांधी जी के आंदोलन का भी विरोध किया था।
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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शुक्ला ने कहा कि 1947 के भारत पाक विभाजन के लिये पं. जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने वाले संघी इतिहास पढ़ लें तो पता चल जायेगा। विभाजन के असली जिम्मेदार आरएसएस और उनके पूरखे हिन्दू महासभा के नेता थे। 1937 में हिन्दु महासभा के उन्नीसवें अधिवेशन में अहमदाबाद में बोलते हुये सावरकर ने द्वि-राष्ट्र सिद्धांत की थ्योरी का खुला समर्थन करते हुये कहा था कि भारत में विरोधाभाषी दो राष्ट्र साथ-साथ रह रहे हैं। भारत को एक मिलाजुला राष्ट्र नहीं माना जा सकता, बल्कि इसके विपरीत भारत में हिन्दू और मुस्लिमों के रूप में दो देश बसे हैं।
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उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को संवाददाता सम्मेलन में सावरकर ने जिन्ना के द्वि-राष्ट्र के सिद्धांत का खुला समर्थन करते हुये कहा था कि ”मुस्लिम लीग के अध्यक्ष जिन्नाह के द्वि-राष्ट्र सिद्धांत से मेरा कोई झगड़ा नहीं है। हम हिन्दू लोग अपने आप में एक राष्ट्र है और यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि हिन्दू और मुस्लमान दो राष्ट्र है।” 1942 के अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन का भी आरएसएस और हिन्दू महासभा ने जमकर विरोध किया था और अंग्रेजों की बनाई गयी रक्षा समिति में शामिल होकर मुखबिरी की एवं और स्वंतत्रता संग्राम को कुचलने में भागीदार भी बने। आजादी के पूर्व अंतरिम सरकार में मुस्लिम लीग के साथ मिलकर आरएसएस और हिन्दू महासभा ने कई राज्यों में सरकार भी बनाई। मुस्लिम लीग और आरएसएस दोनो की विचारधारा सम्मान है और देश के विभाजन के लिये दोनों ही समान रूप से जिम्मेदार है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सच्चाई यह है कि भाजपा और आरएसएस की राजनीति नफरत और भेदभाव पर आधारित रही है। कांग्रेस द्वारा 26 जनवरी 1930 में पूर्ण स्वराज दिवस मनाने का आह्वान किया गया तब आरएसएस ने सभी शाखाओं को आदेश दिया की वे तिरंगा न फहराये। 14 अगस्त 1947 को भी आरएसएस ने तिरंगे को अपसगुन, बुरा, और घातक कहा था जो आरएसएस के अंग्रेजी पत्र आर्गनाइजर में भी प्रकाशित हुआ था।