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छत्तीसगढ़ में महिला पुलिस के साथ दरिंदगी: कपड़े फाड़े, अर्धनग्न कर पीटा; दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़ Published by: ललित कुमार सिंह Updated Fri, 02 Jan 2026 06:14 PM IST
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सार

Tamnar Raigarh Violence: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पिछले दिनों तमनार में हुए हिंसक झडप मामले में महिला आरक्षक के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के बाद रायगढ़ पुलिस अब कुंभकर्णी नींद से जगी है।

Chhattisgarh Woman police officer assaulted in Tamnar Raigarh, Tamnar Violent clash
छत्तीसगढ़ में महिला पुलिस के साथ दरिंदगी - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार

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Tamnar Raigarh Violence: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में महिला पुलिस आरक्षक के साथ हुए अमानवीय कृत्य मामले में रायगढ़ पुलिस अब कुंभकर्णी नींद से जगी है। अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।






जेल ले जाते वक्त आरोपियों को महिला पुलिसकर्मियों ने रोका 
शुक्रवार की शाम पुलिस ने दो आरोपी मंगल राठिया उर्फ करम राठिया आमगांव, चीनेश खम्हारी को तमनार क्षेत्र के ग्राम आमगांव से गिरफ्तार कर उन्हें जेल दाखिल कराने पहुंची। इस दौरान जेल के बाहर पुलिस की गाड़ी को महिला आरक्षकों ने रोक लिया और आरोपियों को बाहर निकालने की बात कही। इस मामले की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों को किसी तरह शांत कराया और आरोपियों को जेल पहुंचाया। 
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एसपी दिव्यांग पटेल ने कहा कि ड्यूटी के दौरान महिला पुलिस अधिकारी के साथ हुई बेहद अमानवीय घटना के मामले में हत्या की कोशिश और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी लोगों की पहचान करके उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





जानिए क्या है पूरा मामला
तमनार क्षेत्र के 14 गांव के ग्रामीण 27 दिसंबर 2025 को एक खदान के गारे पेलमा कोल ब्लॉक के लिये हुई जनसुनवाई को फर्जी बताकर लिबरा गांव में स्थित सीएचपी चौक में धरना प्रदर्शन कर रहे थे। जिससे कंपनी में भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। शनिवार की दोपहर भारी संख्या में पुलिस बल सीएचपी चौक पहुंची और आंदोलन कर रहे कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि इस दौरान गाड़ियों का परिचालन शुरू होते ही तमनार क्षेत्र के ग्राम खुषरूलेंगा गांव में भारी वाहन की चपेट में आकर साइकिल सवार एक ग्रामीण बुरी तरह घायल हो गया। जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने वाहन के चालक को गाड़ी में बांधकर उसकी जमकर पिटाई की थी।



मामले की जानकारी मिलते ही तमनार थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर आक्रोशित ग्रामीणों को समझा रही थी। मगर आक्रोशित ग्रामीणों ने लात- घूसों और लाठी- डंडे से महिला थाना प्रभारी को जमकर पीटा। ग्रामीणों ने वहां मौजूद कई  गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस घटना में घायल पुलिसकर्मियों को उपचार के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तनाव को देखते हुए पूरे गांव का बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।
 

27 दिसंबर को हुई थी हिंसक घटना
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि महिला आरक्षक के साथ जो घटना हुई है, उसमें गंभीर धाराओं जैसे - हत्या के प्रयास, लूट करना, सील भंग करने की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी  हुई है। अन्य आरोपियों की तलाश के लिये वीडियो फुटेज और अन्य प्रयासों से जानकारी जुटाई जा रही है।  

 

 



तमनार के 14 गांव के ग्रामीणों ने कड़ी निंदा की
इधर, तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध में शांतिपूर्ण धरना दे रहे 14 गांवों के ग्रामीणों ने इस शर्मनाक घटना की निंदा की है। ग्रामीणों ने कहा कि इस घृणित और निंदनीय घटना को अंजाम देने वाले असामाजिक तत्वों से उनका किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। 14 गांवों की जनता इस घटना की एक स्वर में भर्त्सना करती है और शासन-प्रशासन से मांग करती है कि घटना में शामिल सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं शांतिपूर्ण आंदोलनरत ग्रामीणों की छवि को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को नाकाम किया जा सके।









 


'एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा'

ग्रामीणों ने कहा कि यह घटना शांतिपूर्ण जनआंदोलन को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। तमनार क्षेत्र के ग्रामीण पिछले 20-21 दिनों से पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आंदोलनरत हैं। ऐसे में उनकी ओर से हिंसा करने का आरोप पूरी तरह निराधार और असत्य है। इस आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से असामाजिक तत्वों की घुसपैठ करने का प्रयास किया गया, जिसे ग्रामीणों की सजगता विफल किया गया। ग्रामीणों ने याद दिलाया कि वर्ष 2008 में गारे-खम्हरिया में कंपनी से जुड़े 200 से अधिक गुंडों ने जनसुनवाई स्थल पर घुसकर प्रशासनिक अमले और आम जनता पर पथराव किए जाने की घटना सर्वविदित है, जिसकी सच्चाई आज भी जनता के जहन में है।

 

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