{"_id":"6a69e44042d7efc6a409c8fa","slug":"chief-secretary-stresses-on-making-irrigation-projects-more-practical-sustainable-and-utilizing-resources-bet-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG: मुख्य सचिव ने सिंचाई परियोजनाओं को अधिक व्यवहारिक, टिकाऊ और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर दिया जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG: मुख्य सचिव ने सिंचाई परियोजनाओं को अधिक व्यवहारिक, टिकाऊ और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर दिया जोर
Wed, 29 Jul 2026 05:00 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 29 Jul 2026 05:00 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने सिंचाई परियोजनाओं को अधिक व्यवहारिक, टिकाऊ और संसाधनों के संरक्षण पर आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक संपन्न
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने सिंचाई परियोजनाओं को अधिक व्यवहारिक, टिकाऊ और संसाधनों के संरक्षण पर आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नई परियोजनाओं के प्रस्तावों का पुनर्मूल्यांकन कर उन्हें आधुनिक तकनीकों और बेहतर जल प्रबंधन के अनुरूप तैयार किया जाए।
मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में बुधवार को परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की 72वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड की हल्दीमुण्डा व्यपवर्तन शीर्ष कार्य, जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण एवं बहुद्देशीय उद्वहन सिंचाई योजना तथा बेमेतरा जिले की शिवनाथ नदी में ग्राम मोतिमपुर-बिरौदा एनीकट को बैराज में परिवर्तित करने और उद्वहन सिंचाई योजना के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विज्ञापन
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी प्रस्तावित योजनाओं की री-मॉडलिंग और री-वर्क करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण में जल संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य और आधुनिक तकनीकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि योजनाएं दीर्घकाल तक प्रभावी और उपयोगी बनी रहें।
उन्होंने नहर आधारित व्यवस्था के स्थान पर समर्पित पाइपलाइन प्रणाली की व्यवहार्यता का भी विस्तृत अध्ययन करने को कहा। उनके अनुसार पाइपलाइन आधारित प्रणाली से जल की बर्बादी कम होगी, परियोजनाएं कम समय और लागत में पूरी हो सकेंगी तथा भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी काफी घटेगी।
मुख्य सचिव ने प्रत्येक परियोजना में ऑप्शन एनालिसिस अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए, ताकि उपलब्ध विकल्पों का तुलनात्मक अध्ययन कर सबसे प्रभावी और किफायती मॉडल का चयन किया जा सके। साथ ही उन्होंने आगामी 5 से 10 वर्षों के संचालन एवं रखरखाव की स्पष्ट कार्ययोजना पहले से तैयार करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नई परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने से पहले वर्तमान में निर्माणाधीन योजनाओं को तय समय सीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करना सुनिश्चित करें। बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्तावों का दोबारा परीक्षण कर आवश्यक सुधारों के साथ संशोधित प्रस्ताव समिति के समक्ष पेश करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन, वित्त, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, आवास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में बुधवार को परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की 72वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई।
विज्ञापन
बैठक में जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड की हल्दीमुण्डा व्यपवर्तन शीर्ष कार्य, जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण एवं बहुद्देशीय उद्वहन सिंचाई योजना तथा बेमेतरा जिले की शिवनाथ नदी में ग्राम मोतिमपुर-बिरौदा एनीकट को बैराज में परिवर्तित करने और उद्वहन सिंचाई योजना के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विज्ञापन
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी प्रस्तावित योजनाओं की री-मॉडलिंग और री-वर्क करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण में जल संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य और आधुनिक तकनीकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि योजनाएं दीर्घकाल तक प्रभावी और उपयोगी बनी रहें।
उन्होंने नहर आधारित व्यवस्था के स्थान पर समर्पित पाइपलाइन प्रणाली की व्यवहार्यता का भी विस्तृत अध्ययन करने को कहा। उनके अनुसार पाइपलाइन आधारित प्रणाली से जल की बर्बादी कम होगी, परियोजनाएं कम समय और लागत में पूरी हो सकेंगी तथा भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी काफी घटेगी।
मुख्य सचिव ने प्रत्येक परियोजना में ऑप्शन एनालिसिस अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए, ताकि उपलब्ध विकल्पों का तुलनात्मक अध्ययन कर सबसे प्रभावी और किफायती मॉडल का चयन किया जा सके। साथ ही उन्होंने आगामी 5 से 10 वर्षों के संचालन एवं रखरखाव की स्पष्ट कार्ययोजना पहले से तैयार करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नई परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने से पहले वर्तमान में निर्माणाधीन योजनाओं को तय समय सीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करना सुनिश्चित करें। बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्तावों का दोबारा परीक्षण कर आवश्यक सुधारों के साथ संशोधित प्रस्ताव समिति के समक्ष पेश करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन, वित्त, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, आवास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।