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एक अभ्यर्थी- कई जिलों में चयन: आरक्षक भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में, सिस्टम की गलती से 1500 पद रह गए खाली
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 22 Jan 2026 01:44 PM IST
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सार
छत्तीसगढ़ में चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। पुलिस विभाग द्वारा शुरू की गई छह हजार पदों की भर्ती में लगभग 1500 पद खाली रह गए हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। पुलिस विभाग द्वारा शुरू की गई छह हजार पदों की भर्ती में लगभग 1500 पद खाली रह गए हैं। बताया जा रहा है कि यह स्थिति भर्ती व्यवस्था में अपनाए गए कॉमन टेस्ट और कॉमन कोड सिस्टम की वजह से बनी है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने राज्य के अलग-अलग जिलों के लिए आरक्षक भर्ती निकाली थी, लेकिन आवेदन प्रक्रिया के दौरान सभी जिलों के लिए एक ही कॉमन कोड जारी कर दिया गया। इस कारण कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों में एक साथ आवेदन कर दिया। जब शारीरिक परीक्षा और अन्य चरण पूरे होने के बाद मेरिट सूची जारी हुई, तो कई उम्मीदवारों के नाम एक से ज्यादा जिलों की सूची में शामिल हो गए। ऐसे में जब किसी अभ्यर्थी ने एक जिले में ज्वाइनिंग कर ली, तो बाकी जिलों में उसी अभ्यर्थी से जुड़ी सीटें खाली रह गईं। इसी वजह से कुल छह हजार पदों में से करीब 1500 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी।
पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल लगभग 1700 चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण शुरू किया जा चुका है। प्रशिक्षण के बाद दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम प्रक्रिया पूरी होने पर यह साफ हो पाएगा कि किस जिले में कितने पद रिक्त रह गए हैं। भर्ती से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग आवेदन कोड जारी किए जाते या एक अभ्यर्थी को केवल एक जिले में आवेदन की अनुमति दी जाती, तो यह समस्या नहीं आती। इसी कारण इस पूरे मामले को भर्ती प्रक्रिया की गंभीर प्रशासनिक गलती माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि खाली पड़े इन 1500 पदों पर दोबारा भर्ती होगी या नहीं। फिलहाल इस संबंध में पुलिस विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।
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जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने राज्य के अलग-अलग जिलों के लिए आरक्षक भर्ती निकाली थी, लेकिन आवेदन प्रक्रिया के दौरान सभी जिलों के लिए एक ही कॉमन कोड जारी कर दिया गया। इस कारण कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों में एक साथ आवेदन कर दिया। जब शारीरिक परीक्षा और अन्य चरण पूरे होने के बाद मेरिट सूची जारी हुई, तो कई उम्मीदवारों के नाम एक से ज्यादा जिलों की सूची में शामिल हो गए। ऐसे में जब किसी अभ्यर्थी ने एक जिले में ज्वाइनिंग कर ली, तो बाकी जिलों में उसी अभ्यर्थी से जुड़ी सीटें खाली रह गईं। इसी वजह से कुल छह हजार पदों में से करीब 1500 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी।
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पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल लगभग 1700 चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण शुरू किया जा चुका है। प्रशिक्षण के बाद दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम प्रक्रिया पूरी होने पर यह साफ हो पाएगा कि किस जिले में कितने पद रिक्त रह गए हैं। भर्ती से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग आवेदन कोड जारी किए जाते या एक अभ्यर्थी को केवल एक जिले में आवेदन की अनुमति दी जाती, तो यह समस्या नहीं आती। इसी कारण इस पूरे मामले को भर्ती प्रक्रिया की गंभीर प्रशासनिक गलती माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि खाली पड़े इन 1500 पदों पर दोबारा भर्ती होगी या नहीं। फिलहाल इस संबंध में पुलिस विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।