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Chhattisgarh: लगातार बारिश से कुम्हारों का व्यवसाय चौपट, नवरात्र और दीपावली की तैयारी पर असर
अमर उजाला नेटवर्क, रामानुजगंज
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 17 Sep 2025 12:21 PM IST
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सार
कुम्हार लक्ष्मी प्रजापति ने बताया कि पिछले वर्ष नवरात्रि के दौरान उन्होंने करीब 10,000 मिट्टी के कलसों की बिक्री की थी। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। कलसों का निर्माण तो किसी तरह हो गया है, परंतु लगातार बारिश और धूप न निकलने के कारण वे सूख नहीं पाए हैं।
लगातार बारिश से कुम्हारों का व्यवसाय चौपट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों में हो रहे बारिश से लोगों में परेशानी बढ़ गई है। रामानुजगंज में बारिश ने कुम्हार समाज के लोगों की आजीविका पर बुरा प्रभाव डाला है। नवरात्रि और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के पहले जहां कुम्हारों को अच्छा व्यापार होता था, वहीं इस बार बारिश के मौसम ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
कुम्हार लक्ष्मी प्रजापति ने बताया कि पिछले वर्ष नवरात्रि के दौरान उन्होंने करीब 10,000 मिट्टी के कलसों की बिक्री की थी। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। कलसों का निर्माण तो किसी तरह हो गया है, परंतु लगातार बारिश और धूप न निकलने के कारण वे सूख नहीं पाए हैं। नमी के कारण कलसे टूटने का खतरा बना हुआ है।
सिर्फ नवरात्रि ही नहीं, दीपावली की तैयारियाँ भी पहले से शुरू हो जाती हैं। मिट्टी के दीपक (दिये) तैयार हो रहे हैं, लेकिन उनके सूखने में भी दिक्कत आ रही है। बारिश के कारण धूप न मिल पाने से दीयों का उत्पादन और भंडारण दोनों प्रभावित हो रहा है। कुम्हार सुरेश प्रजापति ने बताया कि इस मौसम में लगातार पानी गिरने से न तो मिट्टी ठीक से सूख रही है, न ही बनाए गए सामान टिक पा रहे हैं।
कुम्हारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो त्योहारों पर स्थानीय बाजार में मिट्टी के सामान की भारी कमी हो सकती है। इससे न केवल उनकी आय प्रभावित होगी, बल्कि पारंपरिक त्योहारी संस्कृति पर भी असर पड़ेगा।
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कुम्हार लक्ष्मी प्रजापति ने बताया कि पिछले वर्ष नवरात्रि के दौरान उन्होंने करीब 10,000 मिट्टी के कलसों की बिक्री की थी। लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। कलसों का निर्माण तो किसी तरह हो गया है, परंतु लगातार बारिश और धूप न निकलने के कारण वे सूख नहीं पाए हैं। नमी के कारण कलसे टूटने का खतरा बना हुआ है।
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सिर्फ नवरात्रि ही नहीं, दीपावली की तैयारियाँ भी पहले से शुरू हो जाती हैं। मिट्टी के दीपक (दिये) तैयार हो रहे हैं, लेकिन उनके सूखने में भी दिक्कत आ रही है। बारिश के कारण धूप न मिल पाने से दीयों का उत्पादन और भंडारण दोनों प्रभावित हो रहा है। कुम्हार सुरेश प्रजापति ने बताया कि इस मौसम में लगातार पानी गिरने से न तो मिट्टी ठीक से सूख रही है, न ही बनाए गए सामान टिक पा रहे हैं।
कुम्हारों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो त्योहारों पर स्थानीय बाजार में मिट्टी के सामान की भारी कमी हो सकती है। इससे न केवल उनकी आय प्रभावित होगी, बल्कि पारंपरिक त्योहारी संस्कृति पर भी असर पड़ेगा।