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Dhamtari News: राष्ट्रपति भवन में गूंजी छत्तीसगढ़ की मांदर, सरईटोला के कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
Wed, 19 Aug 2026 10:05 AM IST
धमतरी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी
Published by: धमतरी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 10:05 AM IST
सार
सरईटोला की मिट्टी से निकली मांदर की थाप दिल्ली के राष्ट्रपति भवन तक पहुंची। स्वतंत्रता दिवस समारोह में स्थानीय आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
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जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल ने राष्ट्रपति भवन में दी प्रस्तुति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सरईटोला (गुडरापार) के प्रसिद्ध जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल ने राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में पारंपरिक लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। मांदर की थाप, पारंपरिक गीतों और सामूहिक नृत्य ने समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेर दी।
राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर ग्रामीण अंचल के कलाकारों को प्रस्तुति देने का अवसर धमतरी और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय रहा। सरईटोला का यह दल अपनी पारंपरिक नृत्य शैली, गुट्टा मांदर की ऊर्जावान थाप, लोकगीतों, वेशभूषा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के लिए जाना जाता है। इनकी प्रस्तुतियों में आदिवासी समाज के लोकजीवन, उत्सव, सामुदायिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।
दल के सचिव रूपराय नेताम के अनुसार नागपुर सांस्कृतिक भवन ने दल की उत्कृष्ट प्रस्तुति और पारंपरिक कला की विशिष्टता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देने के लिए उसका चयन किया था। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के मंच पर छत्तीसगढ़ की लोककला प्रस्तुत करना सभी कलाकारों के लिए गौरव और सम्मान का अवसर रहा। इस मौके पर रतनलाल निषाद, सुरेंद्र सोरी, हेमंत सोरी, सुलोचना सोरी और मधु नेताम सहित दल के कलाकारों ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
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ये भी पढ़ें: CG News: अम्बिकापुर में बनेगा नया जिला न्यायालय भवन, भूमि पूजन के साथ खुला आधुनिक न्याय व्यवस्था का रास्ता
लोकनृत्य में दिखता है आदिवासी जीवन
सरईटोला का मांदरी नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की लोकस्मृतियों, सामुदायिक जीवन और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने का जरिया भी है। फसल कटाई, मेलों, उत्सवों और विभिन्न सामाजिक अवसरों पर इस पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति की जाती है। पारंपरिक परिधान, आभूषण, वाद्ययंत्र और सामूहिक नृत्य इसकी प्रस्तुति को विशेष बनाते हैं। मांदर की थाप के साथ कलाकारों का सामूहिक तालमेल इस कला की विशिष्ट पहचान है।
कलेक्टर ने दी बधाई
धमतरी कलेक्टर ने कलाकारों और समिति के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन जैसे राष्ट्रीय मंच पर जिले की लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला का प्रदर्शन पूरे धमतरी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
ग्रामीण कलाकारों को मिली राष्ट्रीय पहचान
मांदर की गूंज के साथ सरईटोला के कलाकारों ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी देश के सामने प्रस्तुत किया। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए लोककला और परंपराओं को सहेजने की प्रेरणा बनेगी।
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राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर ग्रामीण अंचल के कलाकारों को प्रस्तुति देने का अवसर धमतरी और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय रहा। सरईटोला का यह दल अपनी पारंपरिक नृत्य शैली, गुट्टा मांदर की ऊर्जावान थाप, लोकगीतों, वेशभूषा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के लिए जाना जाता है। इनकी प्रस्तुतियों में आदिवासी समाज के लोकजीवन, उत्सव, सामुदायिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।
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दल के सचिव रूपराय नेताम के अनुसार नागपुर सांस्कृतिक भवन ने दल की उत्कृष्ट प्रस्तुति और पारंपरिक कला की विशिष्टता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देने के लिए उसका चयन किया था। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के मंच पर छत्तीसगढ़ की लोककला प्रस्तुत करना सभी कलाकारों के लिए गौरव और सम्मान का अवसर रहा। इस मौके पर रतनलाल निषाद, सुरेंद्र सोरी, हेमंत सोरी, सुलोचना सोरी और मधु नेताम सहित दल के कलाकारों ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
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लोकनृत्य में दिखता है आदिवासी जीवन
सरईटोला का मांदरी नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की लोकस्मृतियों, सामुदायिक जीवन और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने का जरिया भी है। फसल कटाई, मेलों, उत्सवों और विभिन्न सामाजिक अवसरों पर इस पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति की जाती है। पारंपरिक परिधान, आभूषण, वाद्ययंत्र और सामूहिक नृत्य इसकी प्रस्तुति को विशेष बनाते हैं। मांदर की थाप के साथ कलाकारों का सामूहिक तालमेल इस कला की विशिष्ट पहचान है।
कलेक्टर ने दी बधाई
धमतरी कलेक्टर ने कलाकारों और समिति के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन जैसे राष्ट्रीय मंच पर जिले की लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला का प्रदर्शन पूरे धमतरी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
ग्रामीण कलाकारों को मिली राष्ट्रीय पहचान
मांदर की गूंज के साथ सरईटोला के कलाकारों ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को भी देश के सामने प्रस्तुत किया। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए लोककला और परंपराओं को सहेजने की प्रेरणा बनेगी।