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राजाडेरा बांध का तटबंध टूटा: धमतरी में जल संसाधन विभाग की लापरवाही से किसानों में बढ़ा आक्रोश

Mon, 03 Nov 2025 09:46 PM IST
राहुल तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी Published by: राहुल तिवारी Updated Mon, 03 Nov 2025 09:46 PM IST
सार

धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक में राजाडेरा बांध का तटबंध टूटने से इलाके में हड़कंप मच गया। बांध टूटे 40 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से पानी रोकने की कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे किसानों में नाराजगी है।
 

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Farmers upset due to breach of embankment of Rajadera Dam in Dhamtari
राजाडेरा बांध का तटबंध टूटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धमतरी जिले में जल संसाधन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिले के मगरलोड ब्लॉक में बने राजाडेरा बांध का तटबंध अचानक टूटने से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। वहीं, बांध का तटबंध ध्वस्त होने के लगभग 40 घंटे बाद भी विभाग द्वारा पानी को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बताया गया कि मगरलोड ब्लॉक में राजाडेरा बांध करीब 15 साल पहले करोड़ों की लागत से बनाया गया था, जिसकी कुल जलभराव क्षमता 7.43 एमसीएम है।

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स्थानीय लोगों ने बताया कि तटबंध में कुछ दिन पहले पानी का तेज रिसाव शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते लगभग 30 फीट तक ढह गया। इसकी वजह से बांध का लगभग 30 प्रतिशत पानी आसपास के इलाकों में बहकर बर्बाद हो गया। वहीं, बांध का तटबंध ध्वस्त होने के दो दिन और एक रात बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा पानी को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों में भारी नाराजगी है और वे अपनी बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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बताया जाता है कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से मगरलोड विकासखंड में राजाडेरा बांध का निर्माण लगभग 15 वर्ष पूर्व किया गया था। इस बांध का निर्माण ग्राम राजाडेरा, रेंगाडीह, परसाबुड़ा, दुधवारा, शुक्लाभांठा, कुल्हाड़ीकोट, अमलीडीह, गाड़ाडीह, कपालफोड़ी, बेलरदोना, नारधा, डूमरपाली, आमाचानी, बुढ़ाराव, चारभांठा, कोरगांव और तेंदूभांठा सहित 17 गांवों के किसानों को पानी पहुंचाने की योजना के तहत किया गया था।
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हालांकि जलाशय के निर्माण के समय से ही कार्य में अनियमितता की कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण बांध महज 15 वर्षों में ही ध्वस्त हो गया। इससे बारिश का सारा जलभराव व्यर्थ बह गया और किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं।

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