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Dhamtari News: जिले के 357 जल स्रोतों पर बनेंगे सैंड फिल्टर, भू-जल संवर्धन व जल स्रोत संरक्षण को मिलेगी नई गति

Tue, 04 Aug 2026 09:33 AM IST
धमतरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी Published by: धमतरी ब्यूरो Updated Tue, 04 Aug 2026 09:33 AM IST
सार

धमतरी जिला प्रशासन ने जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए वीबी-जी रामजी योजना के तहत 357 सामुदायिक जल स्रोतों पर सैंड फिल्टर निर्माण की स्वीकृति दी है।

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Sand filters to be constructed at 357 water sources in the district
फोटो

विस्तार

जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को जनभागीदारी से जोड़ते हुए धमतरी जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत जिले के 357 जल स्रोतों पर सैंड फिल्टर निर्माण कार्यों के लिए 185.64 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
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यह पहल वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा भू-जल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार धमतरी विकासखंड में 78, कुरूद विकासखंड में 124, मगरलोड विकासखंड में 48 तथा नगरी विकासखंड में 107 सैंड फिल्टर निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन सभी कार्यों का क्रियान्वयन संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से निर्धारित समय-सीमा में किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को शीघ्र लाभ मिल सके।
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मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने बताया कि सैंड फिल्टर जल स्रोतों के संरक्षण की एक वैज्ञानिक एवं प्रभावी तकनीक है। तालाब, कुएं, जलाशय तथा अन्य सामुदायिक जल स्रोतों के समीप सैंड फिल्टर के निर्माण से वर्षा जल के साथ आने वाली मिट्टी, गाद, प्लास्टिक, कचरा तथा अन्य अशुद्धियां प्राकृतिक रूप से छन जाती हैं।
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इससे जल स्रोतों में गाद का जमाव कम होता है, जल की गुणवत्ता बनी रहती है तथा भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को भी मजबूती मिलती है। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य केवल जल स्रोतों का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करते हुए जल उपलब्धता को दीर्घकालिक आधार प्रदान करना भी है।वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और बढ़ते जल दोहन के कारण भू-जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।


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ऐसे परिदृश्य में सैंड फिल्टर वर्षा जल को प्राकृतिक रूप से भूमि में समाहित होने में सहायता करेंगे, जिससे भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा तथा भविष्य में संभावित पेयजल संकट की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। जिला प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों से सैंड फिल्टर निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव और स्वच्छता सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है।
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