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वनांचल की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर: दुगली का वन उत्पाद प्रसंस्करण केन्द्र बना ग्रामीण आजीविका का उदाहरण
Fri, 24 Oct 2025 07:00 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 24 Oct 2025 07:00 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के वनांचल क्षेत्र दुगली ग्राम स्थित एमएफपी प्रोसेसिंग सेंटर (वन उत्पाद प्रसंस्करण केन्द्र) ग्रामीण आजीविका के सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बन गया है।
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दुगली का वन उत्पाद प्रसंस्करण केन्द्र बना ग्रामीण आजीविका का उदाहरण
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के वनांचल क्षेत्र दुगली ग्राम स्थित एमएफपी प्रोसेसिंग सेंटर (वन उत्पाद प्रसंस्करण केन्द्र) ग्रामीण आजीविका के सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बन गया है। इस केन्द्र में एलोवेरा, मूसली, आंवला, शतावर, अर्जुन, तिखुर, माहुल पत्ता जैसे वनोपजों से 22 विविध उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। राज्यपाल रमेन डेका ने शुक्रवार को दुगली ग्राम पहुंचकर वनधन विकास केन्द्र का निरीक्षण किया। उन्होंने महिला समूहों द्वारा एलोवेरा से तैयार किए जा रहे उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग प्रक्रिया को निकट से देखा और उनकी सराहना की। राज्यपाल ने समूहों द्वारा तैयार अन्य उत्पादों का भी अवलोकन किया।
इनमें एलोवेरा से निर्मित शैम्पू, बॉडी वॉश, साबुन, हेयर कंडीशनर, मॉइश्चराइजर, जैल, जूस, मूसली लड्डू, वज्रदंती हर्बल पाउडर, आंवला जूस, कैंडी, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा पाउडर और दोना-पत्तल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के निर्माण से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का सशक्त साधन मिला है।
मुख्य वन संरक्षक सतोविशा समाजदार ने राज्यपाल को एलोवेरा जैल निर्माण, तिखुर प्रसंस्करण और दोना-पत्तल निर्माण की प्रक्रिया की जानकारी दी। मौके पर सचिव राज्यपाल सी.आर. प्रसन्ना, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी जाधव श्रीकृष्ण, सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य के वनमंडलाधिकारी वरुण जैन, प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ अनिल साहू और जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा उपस्थित थे। राज्यपाल ने केन्द्र परिसर में लगाई गई एलोवेरा और तिखुर की खेती का भी निरीक्षण किया। इस दौरान कमार जनजाति के समाज प्रमुख, पर्यटन समिति के सदस्य और लखपति दीदियों से राज्यपाल ने आत्मीय संवाद किया।
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लखपति दीदी देवकुमारी साहू ने बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर सेंट्रिंग और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का कार्य करती हैं, जिससे उन्हें गांव में ही रोजगार और स्थायी आमदनी मिल रही है। बिहान से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक सुधार हुआ है और अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दिला पा रही हैं। इको-टूरिज्म समिति के सदस्य माधव सिंह मरकाम ने बताया कि जबर्रा ग्राम की प्राकृतिक सुंदरता को प्रदर्शित करने के लिए समिति गठित की गई है, जिससे देश-विदेश के पर्यटक यहां आकर्षित हो रहे हैं। समिति के माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार प्राप्त हुआ है और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इस अवसर पर नगरी विकासखंड के लीफ आर्टिस्ट विकास शांडिल्य ने पीपल के पत्ते पर उकेरी गई शेर की कलात्मक आकृति राज्यपाल को भेंट की। राज्यपाल ने उनकी कला की प्रशंसा करते हुए आकृतियों के निर्माण में लगने वाले समय और उनकी कीमत के बारे में जानकारी ली तथा विकास को और भी कलात्मक पत्ते तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल ने दौरे के समापन पर महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके कार्यों की सराहना की और उनके साथ स्मृति स्वरूप छायाचित्र भी लिए। यह दौरा ग्रामीण आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तिकरण और वन संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में धमतरी जिले के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण साबित हुआ है।
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इनमें एलोवेरा से निर्मित शैम्पू, बॉडी वॉश, साबुन, हेयर कंडीशनर, मॉइश्चराइजर, जैल, जूस, मूसली लड्डू, वज्रदंती हर्बल पाउडर, आंवला जूस, कैंडी, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा पाउडर और दोना-पत्तल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के निर्माण से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का सशक्त साधन मिला है।
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मुख्य वन संरक्षक सतोविशा समाजदार ने राज्यपाल को एलोवेरा जैल निर्माण, तिखुर प्रसंस्करण और दोना-पत्तल निर्माण की प्रक्रिया की जानकारी दी। मौके पर सचिव राज्यपाल सी.आर. प्रसन्ना, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी जाधव श्रीकृष्ण, सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य के वनमंडलाधिकारी वरुण जैन, प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ अनिल साहू और जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा उपस्थित थे। राज्यपाल ने केन्द्र परिसर में लगाई गई एलोवेरा और तिखुर की खेती का भी निरीक्षण किया। इस दौरान कमार जनजाति के समाज प्रमुख, पर्यटन समिति के सदस्य और लखपति दीदियों से राज्यपाल ने आत्मीय संवाद किया।
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लखपति दीदी देवकुमारी साहू ने बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर सेंट्रिंग और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का कार्य करती हैं, जिससे उन्हें गांव में ही रोजगार और स्थायी आमदनी मिल रही है। बिहान से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक सुधार हुआ है और अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दिला पा रही हैं। इको-टूरिज्म समिति के सदस्य माधव सिंह मरकाम ने बताया कि जबर्रा ग्राम की प्राकृतिक सुंदरता को प्रदर्शित करने के लिए समिति गठित की गई है, जिससे देश-विदेश के पर्यटक यहां आकर्षित हो रहे हैं। समिति के माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार प्राप्त हुआ है और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इस अवसर पर नगरी विकासखंड के लीफ आर्टिस्ट विकास शांडिल्य ने पीपल के पत्ते पर उकेरी गई शेर की कलात्मक आकृति राज्यपाल को भेंट की। राज्यपाल ने उनकी कला की प्रशंसा करते हुए आकृतियों के निर्माण में लगने वाले समय और उनकी कीमत के बारे में जानकारी ली तथा विकास को और भी कलात्मक पत्ते तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल ने दौरे के समापन पर महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके कार्यों की सराहना की और उनके साथ स्मृति स्वरूप छायाचित्र भी लिए। यह दौरा ग्रामीण आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तिकरण और वन संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में धमतरी जिले के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण साबित हुआ है।