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छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू: जबरन धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान
Thu, 16 Jul 2026 12:37 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 16 Jul 2026 12:37 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के लिए नया धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 अब प्रभावी हो गया है। राज्य राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद यह कानून 10 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के लिए नया धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 अब प्रभावी हो गया है। राज्य राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद यह कानून 10 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। नए कानून में बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या अन्य अवैध तरीकों से कराए जाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। अधिनियम के तहत यदि कोई व्यक्ति लालच, दबाव या छलपूर्वक किसी का धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे 7 से 10 वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। साथ ही दोषी पर कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
कानून में महिलाओं, नाबालिगों तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के जबरन धर्मांतरण को अधिक गंभीर अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 से 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यदि सामूहिक धर्मांतरण का मामला सामने आता है तो आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को भी नियमन के दायरे में लाया गया है। धर्म परिवर्तन कराने या कराने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले संबंधित जिला कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा केवल धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से किए गए विवाह को अदालत शून्य घोषित कर सकेगी। ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान किया गया है और मामलों की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
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कानून में महिलाओं, नाबालिगों तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के जबरन धर्मांतरण को अधिक गंभीर अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 से 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यदि सामूहिक धर्मांतरण का मामला सामने आता है तो आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को भी नियमन के दायरे में लाया गया है। धर्म परिवर्तन कराने या कराने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले संबंधित जिला कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा।
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इसके अलावा केवल धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से किए गए विवाह को अदालत शून्य घोषित कर सकेगी। ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान किया गया है और मामलों की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
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