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रायपुर: जेल से परीक्षा केंद्र तक, हाईकोर्ट के आदेश पर री-NEET देने पहुंचा हत्या के लिए उकसाने का आरोपी छात्र

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 21 Jun 2026 01:52 PM IST
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सार

रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद एक छात्र को आज री-NEET यूजी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपी छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया गया।

From jail to exam centre, student accused of abetment to murder appears for re-NEET on High Court orders
हाईकोर्ट के आदेश पर री-NEET देने पहुंचा हत्या के लिए उकसाने का आरोपी छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद एक छात्र को आज री-NEET यूजी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपी छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया गया।


जानकारी के मुताबिक, रायपुर के शिवानंद नगर निवासी कुणाल तरुणकर को विशेष पुलिस सुरक्षा में डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र लाया गया, जहां उसने री-NEET यूजी परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जेल प्रशासन और पुलिस ने विशेष इंतजाम किए।
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कुणाल तरुणकर एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में न्यायिक हिरासत में है। आरोप है कि अप्रैल माह में 20 वर्षीय युवती की आत्महत्या के बाद जांच के दौरान उसकी डायरी में मिले कथित सुसाइड नोट और मोबाइल फोन से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर कुणाल की संलिप्तता सामने आई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी युवती पर लगातार मिलने का दबाव बनाता था और कथित तौर पर मानसिक प्रताड़ना देता था। इसी आधार पर उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
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री-NEET परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए आरोपी की ओर से अधिवक्ता अनुकूल विश्वास ने हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया था। मामले की तत्काल सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने राहत प्रदान की।

अदालत ने रायपुर के पुलिस अधीक्षक और जेल अधीक्षक को निर्देश दिया था कि परीक्षार्थी को निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाने और परीक्षा में शामिल कराने की समुचित व्यवस्था की जाए। आदेश के पालन में जेल प्रशासन ने एएसआई, हवलदार और पुलिस जवानों की विशेष टीम गठित की, जिसने आरोपी को सुरक्षा घेरे में परीक्षा केंद्र पहुंचाया। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और शिक्षा के अधिकार के बीच संतुलन के दृष्टिकोण से चर्चा का विषय बना हुआ है।
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