{"_id":"69f211240d0e5a402c0af51d","slug":"despite-a-90-disability-reshma-kewat-secured-89-75-marks-in-class-12-2026-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"CGBSE Topper : रेशमा केवट का जज्बा, 90 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद 12वीं में पाए 89.75% अंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CGBSE Topper : रेशमा केवट का जज्बा, 90 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद 12वीं में पाए 89.75% अंक
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 29 Apr 2026 07:40 PM IST
विज्ञापन
सार
छात्रा रेशमा केवट ने विपरीत परिस्थितियों में 12वीं आर्ट्स में 89.75 फीसदी अंक प्राप्त कर मिसाल कायम की है। रेशमा बचपन से ही लगभग 90 फीसदी दिव्यांगता के साथ जीवन जी रही हैं। इसके बावजूद, उसने कभी हार नहीं मानी और अपने हौसले व मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की।
दिव्यांग छात्रा रेशमा केवट
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
जिले के मरवाही विकासखंड के दूरस्थ ग्राम बगरार की छात्रा रेशमा केवट ने विपरीत परिस्थितियों में शानदार सफलता प्राप्त की है। स्वामी आत्मानंद हिंदी मीडियम स्कूल, मरवाही की छात्रा रेशमा ने 12वीं कला संकाय में 89.75 फीसदी अंक अर्जित किए हैं। यह उपलब्धि एक मिसाल पेश करती है।
Trending Videos
रेशमा बचपन से ही दिव्यांग हैं। जन्म के समय उनकी दिव्यांगता करीब 100 फीसदी थी। समय के साथ यह कुछ कम हुई, लेकिन वर्तमान में भी वह लगभग 90 फीसदी दिव्यांगता के साथ जीवन जी रही हैं। इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपने हौसले और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
रेशमा के पिता रामकुमार केवट एक किसान हैं। उनकी माता शशिकला केवट गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बीच परिवार ने रेशमा की पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया। रेशमा अपनी बहनों के साथ रोजाना स्कूल जाती थीं। उन्होंने नियमित पढ़ाई कर यह सफलता प्राप्त की।
रेशमा का दृढ़ संकल्प उनकी सफलता का आधार बना। लगभग 90 फीसदी दिव्यांगता के साथ भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित किया। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि मजबूत हौसले हों तो कोई बाधा रुकावट नहीं बन सकती। यह अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
रेशमा के परिवार ने उनकी पढ़ाई में पूरा समर्थन दिया। उनके किसान पिता और गृहिणी माता ने सीमित संसाधनों में भी कोई कमी नहीं आने दी। रेशमा का सपना कलेक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उनकी इस सफलता से परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और शिक्षकों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
