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Chhattisgarh: 14 साल पुराने मामले में फैसला, जमीन विवाद में हत्या के लिए दी थी सुपारी, मुख्य आरोपी को उम्रकैद

अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 27 Apr 2026 05:34 PM IST
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सार

मुख्य आरोपी मीराबाई को 2012 के जमीन विवाद में संजय सिंह की सुपारी देकर हत्या कराने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पेंड्रारोड की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने यह फैसला सुनाया है। मीराबाई ने 30 हजार रुपये की सुपारी देकर तीन आरोपियों को हत्या के लिए उकसाया था।

prime accused sentenced to life imprisonment and found guilty of orchestrating contract killing
मीराबाई की उम्रकैद की सजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जिले में वर्ष 2012 के बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पेंड्रारोड स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने यह निर्णय दिया है। जमीन विवाद में युवक की सुपारी देकर हत्या कराने की दोषी मुख्य आरोपी मीराबाई को आजीवन कारावास की सजा मिली है।

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न्यायालय ने उस पर 2000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम पंडरी निवासी मीराबाई का मृतक संजय सिंह से जमीन को लेकर पुराना विवाद था। यह विवाद मीराबाई के पति श्रवण सिंह से भी जुड़ा था। इसी रंजिश के चलते मीराबाई ने संजय सिंह की हत्या की साजिश रची। उसने तीन लोगों को 30 हजार रुपये की सुपारी दी थी। आरोप है कि मीराबाई ने 29 हजार रुपये नकद देकर आरोपियों को हत्या के लिए उकसाया। इस साजिश को उसने सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था।
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हत्या और साक्ष्य छिपाने का प्रयास
आठ सितंबर 2012 को आरोपियों ने संजय सिंह की हत्या कर दी थी। शव को ग्राम ऐठी के डबरी तालाब में फेंक दिया गया था। इसका उद्देश्य साक्ष्य छिपाना था। पुलिस जांच में इस हत्याकांड में सेवका सिंह, बबलू उर्फ जगनारायण और भोलू उर्फ भोला गोंड की संलिप्तता सामने आई थी। इन तीनों आरोपियों को न्यायालय पहले ही सजा सुना चुका है।

न्यायालय का फैसला और अभियोजन पक्ष
इस मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष मीराबाई के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने पाया कि मीराबाई ने पूरी योजना के तहत हत्या के लिए उकसाया था। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने उसे गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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