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बंगाल में फिर खुलेंगे भ्रष्टाचार के बड़े राज?: दूसरे चरण के मतदान से पहले ईडी का एक्शन, मारे ताबड़तोड़ छापे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Mon, 27 Apr 2026 06:41 PM IST
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सार
क्या पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ ईडी की इस ताबड़तोड़ छापेमारी से कई बड़े राजनेताओं और अफसरों के चेहरे बेनकाब होंगे? कोलकाता, हावड़ा और वर्धमान के 14 ठिकानों पर मारे गए छापों में 28 लाख से ज्यादा कैश और सोना बरामद हुआ है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में समन भेजे जाने के बावजूद डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास ईडी के सामने पेश नहीं हो रहे। आइए मामले को विस्तार से जानते हैं।
ईडी की छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर अपना चाबुक चलाया है। लगातार दो दिन हुई इस बड़ी कार्रवाई से राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। ईडी ने कोलकाता, हावड़ा और वर्धमान सहित कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और कई ऐसे अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो सीधे तौर पर बड़े नेताओं और पुलिस अफसरों की ओर इशारा कर रहे हैं। दूसरे चरण के मतदान से पहले ईडी ने ये कार्रवाई की है।
यह मामला मुख्य रूप से दो अलग-अलग घोटालों से जुड़ा हुआ है। पहला मामला मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) का है, जिसमें पुलिस के एक बड़े अधिकारी और कुछ अन्य लोग शक के घेरे में हैं। वहीं, दूसरा मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी राशन घोटाले से जुड़ा है। ईडी की टीमों ने इन दोनों मामलों में 25 और 26 अप्रैल 2026 को कुल 14 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान जांच एजेंसी को लाखों रुपये का कैश मिला है और कई ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जो आने वाले समय में कई सफेदपोशों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
ईडी को छापेमारी में क्या-क्या मिला?
डीसीपी शांतनु सिन्हा की भूमिका क्यों घेरे में?
राशन (पीडीएस) घोटाले में कहां-कहां हुई छापेमारी?
मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा, 25 अप्रैल 2026 को ईडी ने पीडीएस (राशन) घोटाले में भी बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी निरंजन चंद्र साहा और अन्य संदिग्धों से जुड़े 11 ठिकानों पर की गई। ईडी की टीमों ने कोलकाता, हावड़ा और वर्धमान में यह तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जांच एजेंसी को मौके से 18.4 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। साथ ही, मामले से जुड़े कई डिजिटल सबूत और अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
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यह मामला मुख्य रूप से दो अलग-अलग घोटालों से जुड़ा हुआ है। पहला मामला मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) का है, जिसमें पुलिस के एक बड़े अधिकारी और कुछ अन्य लोग शक के घेरे में हैं। वहीं, दूसरा मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी राशन घोटाले से जुड़ा है। ईडी की टीमों ने इन दोनों मामलों में 25 और 26 अप्रैल 2026 को कुल 14 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान जांच एजेंसी को लाखों रुपये का कैश मिला है और कई ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जो आने वाले समय में कई सफेदपोशों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
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ईडी को छापेमारी में क्या-क्या मिला?
- 26 अप्रैल 2026 को ईडी की कोलकाता जोनल यूनिट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में तीन ठिकानों पर छापे मारे।
- यह कार्रवाई सोना पप्पू, जय एस. कामदार, डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास और अन्य के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है।
- कल्याण शुक्ला और संजय कुमार कनोडिया के परिसरों की तलाशी ली गई।
- इस दौरान 10 लाख रुपये कैश, सोने के गहने, डिजिटल डिवाइस और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
- बरामद दस्तावेजों से पता चलता है कि संदिग्धों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के बीच बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन हुआ है।
डीसीपी शांतनु सिन्हा की भूमिका क्यों घेरे में?
- मामले में डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास की भूमिका बेहद संदिग्ध मानी जा रही है।
- ईडी ने जांच में शामिल होने और पूछताछ के लिए उन्हें आधिकारिक समन (बुलावा) भेजा था।
- हालांकि, डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास अब तक जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं।
- उनके इस तरह पेश न होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं और जांच एजेंसी उनके खिलाफ कड़ा कदम उठा सकती है।
राशन (पीडीएस) घोटाले में कहां-कहां हुई छापेमारी?
मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा, 25 अप्रैल 2026 को ईडी ने पीडीएस (राशन) घोटाले में भी बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी निरंजन चंद्र साहा और अन्य संदिग्धों से जुड़े 11 ठिकानों पर की गई। ईडी की टीमों ने कोलकाता, हावड़ा और वर्धमान में यह तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जांच एजेंसी को मौके से 18.4 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। साथ ही, मामले से जुड़े कई डिजिटल सबूत और अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
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