India-Iran Ties: विदेश मंत्री जयशंकर ने की ईरानी समकक्ष से फोन पर बातचीत, दोनों ने क्षेत्रीय हालात पर की चर्चा
India-Iran Ties: पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी समकक्ष से फोन पर बात की और क्षेत्र के हालात पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिकी नाकेबंदी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। पढ़िए रिपोर्ट-
विस्तार
Received a phone call from Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi of Iran this evening. @araghchi
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 29, 2026
Had a detailed conversation about various aspects of the current situation. We agreed to remain in close touch.
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। हमने मौजूदा हालात के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। हम एक-दूसरे के साथ नजदीक से संपर्क में रहने पर सहमत हुए।
अराघची के मॉस्को दौरे के बाद हुई बातचीत
यह बातचीत अराघची की मॉस्को यात्रा के दो दिन बाद हुई, जहां उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ विस्तार से बातचीत की थी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि दोनों पक्षों ने युद्धविराम, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर विचार साझा किए।
अमेरिकी नाकाबंदी और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर चर्चा
बताया जा रहा है कि बातचीत में अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर ईरान की पाबंदियों से पैदा हुई स्थिति पर भी चर्चा हुई। ईरानी विदेश मंत्री युद्ध खत्म कराने के कूटनीतिक प्रयासों के तहत ओमान और पाकिस्तान की यात्रा के बाद मॉस्को गए थे।
पहले दौर की अमेरिका-ईरान वार्ता रही बेनतीजा
11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई शांति वार्ता का पहला दौर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। पिछले मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था, ताकि तेहरान को युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।
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फरवरी में अमेरिका-इस्राइल के हमलों से शुरू हुआ युद्ध
यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से यह संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया।
