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अति महत्वाकांक्षी पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल: ईरान ने बताया पक्षपाती; अमेरिका ने वीजा पर लगाई रोक!

आईएएनएस, एथेंस Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 29 Apr 2026 11:03 PM IST
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सार

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की दोहरी नीति ने उसे अपने और पराये दोनों के बीच संदिग्ध बना दिया है। जहां ईरान ने उसे अमेरिका का एजेंट करार दिया, वहीं अमेरिका ने उसे हाई रिस्क मानकर वीजा देना बंद कर दिया है। यह मध्यस्थता नहीं, कूटनीतिक विफलता है।
 

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पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल - फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को सुलझाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। एक हालिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को एक सक्रिय विध्वंसक के रूप में चित्रित किया गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें अब पूरी तरह से संदेह के घेरे में हैं।
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अमेरिका का विरोधाभासी रवैया
ग्रीक सिटी टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका आज भी ईरान के साथ संघर्ष में मध्यस्थता के लिए इस्लामाबाद पर निर्भर है। लेकिन दूसरी ओर, उसने पाकिस्तान को उच्च जोखिम वाले देशों की श्रेणी में रखा है। इस श्रेणी में अफगानिस्तान, सोमालिया और यमन जैसे युद्धग्रस्त देश शामिल हैं। 21 जनवरी 2026 से प्रभावी एक आदेश में अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तानी प्रवासियों को वीजा जारी करना बंद कर दिया है। यह कदम स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा के तहत उठाया गया है। अमेरिका को डर है कि पाकिस्तानी प्रवासी वहां की सरकारी सुविधाओं पर बोझ बन सकते हैं।
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ईरान का पाकिस्तान पर अविश्वास
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की छवि ईरान की नजरों में धूमिल हो चुकी है। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका और सऊदी अरब के प्रति झुकाव के कारण समझौतावादी है। ईरानी सांसद इब्राहिम रजाई ने कहा, 'पाकिस्तान एक उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है। वह हमेशा अमेरिका के हितों का ध्यान रखता है और कभी भी अमेरिकियों की इच्छा के विरुद्ध नहीं बोलता।' रजाई ने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने के लिए अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना करने में विफल रहा।

यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान युद्ध से पाकिस्तान बेहाल: शहबाज शरीफ ने बयां किया दर्द, तेल संकट से अर्थव्यवस्था को लगा बड़ा झटका

मध्यस्थता या पक्षपात?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी मध्यस्थों ने ईरान के पक्ष को सही ढंग से अमेरिका तक नहीं पहुंचाया। इसके बजाय, उन्होंने केवल अमेरिकी शर्तों को प्राथमिकता दी। इसमें परमाणु प्रतिबंध और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसे मुद्दे शामिल थे। इस कारण ईरानी मीडिया और टेलीविजन पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता को लेकर बहस छिड़ गई है। ईरान के भीतर पाकिस्तान के प्रति विश्वास की कमी और गहरी हो गई है।

एक तरफ पाकिस्तान युद्धविराम की मध्यस्थता कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसने एक विवादास्पद ट्रांजिट ऑर्डर जारी किया। इसके तहत पाकिस्तान ने छह मार्गों से माल को ईरान तक पहुंचाने की अनुमति दी। इसे अमेरिका समर्थित गुटों ने नौसैनिक नाकेबंदी में कानून में सेंधमारी करना करार दिया। दावा किया गया है कि मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की क्षमताएं सीमित हैं, लेकिन वह महत्वाकांक्षाएं बड़ी रखता है। उसकी इन कोशिशों ने उसकी कमजोर पकड़ को उजागर कर दिया है।

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