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अमेरिका-ईरान युद्ध से पाकिस्तान बेहाल: शहबाज शरीफ ने बयां किया दर्द, तेल संकट से अर्थव्यवस्था को लगा बड़ा झटका
पीटीआई, इस्लामाबाद
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 29 Apr 2026 09:52 PM IST
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सार
अमेरिका-ईरान युद्ध की आग में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था झुलस रही है, जहां तेल का बिल 7,569 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। कंगाली की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अब महाशक्तियों के बीच सुलह कराकर खुद को बचाने की आखिरी कोशिश में जुटा है। वार्ता ही अब क्षेत्र में शांति की एकमात्र उम्मीद बची है।
शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
- फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंचाई है। पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान ने जो आर्थिक सुधार किए थे, वे अब संकट में हैं। शहबाज शरीफ ने कहा कि उनकी सरकार दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए प्रयास जारी रखेगी। पाकिस्तान पश्चिम एशिया में शांति की बहाली के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव
इस्लामाबाद में आयोजित एक कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए शहबाज ने आर्थिक आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले पाकिस्तान का तेल आयात बिल 30 करोड़ डॉलर था। अब यह बढ़कर 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। भारतीय मुद्रा में यह राशि 7,569,71,42,400 रुपये यानी सात हजार पांच सौ उनहत्तर करोड़ रुपये से अधिक होती है। इस भारी बोझ ने देश की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त दबाव पैदा कर दिया है। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि चालू सप्ताह के दौरान पेट्रोलियम की खपत में पिछले सप्ताह की तुलना में कमी दर्ज की गई है।
स्थिति पर नजह रखने के लिए बनाई गई टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री ने कैबिनेट को सूचित किया कि स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टास्क फोर्स रोजाना के आधार पर हालातों की निगरानी कर रही है। शहबाज शरीफ के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए हमेशा ईमानदार कोशिशें की हैं।
बैठक के दौरान शहबाज ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी बात की। उन्होंने खुलासा किया कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच लगातार 21 घंटे तक मैराथन बातचीत हुई थी। शहबाज ने बताया कि इस बातचीत को सफल बनाने के लिए फील्ड मार्शल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन समन्वित प्रयासों के कारण ही युद्धविराम की अवधि बढ़ाई गई, जो फिलहाल प्रभावी है।
यह भी पढ़ें: India-Iran Ties: विदेश मंत्री जयशंकर ने की ईरानी समकक्ष से फोन पर बात, क्षेत्र के हालात पर चर्चा
अराघची के साथ हुई बातचीत- पाकिस्तानी पीएम
प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में पाकिस्तान के दौरे पर आए थे। उनके साथ कई दौर की बातचीत हुई। अराघची ने आश्वासन दिया है कि ईरान अपने नेतृत्व के साथ चर्चा करने के बाद सकारात्मक जवाब देगा। शहबाज ने कहा, 'अराघची के रूस जाने से पहले मैंने उनसे फोन पर बात की थी। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि ओमान में उनकी सभी बैठकें नेक इरादे से हुई हैं। जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।'
विदित हो कि अराघची ने पिछले सप्ताह इस्लामाबाद, मस्कट और मास्को का दौरा किया था। पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता की मेजबानी करने की योजना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी रविवार को दोहराया कि शांति समाधान के लिए दोनों देशों के अधिकारी फोन पर बात कर सकते हैं। ट्रम्प ने पिछले हफ्ते ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था।
यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था। उस वक्त अमेरिकी और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। इस हमले में ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया, जिससे युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव
इस्लामाबाद में आयोजित एक कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए शहबाज ने आर्थिक आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले पाकिस्तान का तेल आयात बिल 30 करोड़ डॉलर था। अब यह बढ़कर 80 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। भारतीय मुद्रा में यह राशि 7,569,71,42,400 रुपये यानी सात हजार पांच सौ उनहत्तर करोड़ रुपये से अधिक होती है। इस भारी बोझ ने देश की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त दबाव पैदा कर दिया है। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि चालू सप्ताह के दौरान पेट्रोलियम की खपत में पिछले सप्ताह की तुलना में कमी दर्ज की गई है।
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स्थिति पर नजह रखने के लिए बनाई गई टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री ने कैबिनेट को सूचित किया कि स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई है। यह टास्क फोर्स रोजाना के आधार पर हालातों की निगरानी कर रही है। शहबाज शरीफ के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए हमेशा ईमानदार कोशिशें की हैं।
बैठक के दौरान शहबाज ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी बात की। उन्होंने खुलासा किया कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच लगातार 21 घंटे तक मैराथन बातचीत हुई थी। शहबाज ने बताया कि इस बातचीत को सफल बनाने के लिए फील्ड मार्शल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन समन्वित प्रयासों के कारण ही युद्धविराम की अवधि बढ़ाई गई, जो फिलहाल प्रभावी है।
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अराघची के साथ हुई बातचीत- पाकिस्तानी पीएम
प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में पाकिस्तान के दौरे पर आए थे। उनके साथ कई दौर की बातचीत हुई। अराघची ने आश्वासन दिया है कि ईरान अपने नेतृत्व के साथ चर्चा करने के बाद सकारात्मक जवाब देगा। शहबाज ने कहा, 'अराघची के रूस जाने से पहले मैंने उनसे फोन पर बात की थी। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि ओमान में उनकी सभी बैठकें नेक इरादे से हुई हैं। जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।'
विदित हो कि अराघची ने पिछले सप्ताह इस्लामाबाद, मस्कट और मास्को का दौरा किया था। पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता की मेजबानी करने की योजना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी रविवार को दोहराया कि शांति समाधान के लिए दोनों देशों के अधिकारी फोन पर बात कर सकते हैं। ट्रम्प ने पिछले हफ्ते ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था।
यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था। उस वक्त अमेरिकी और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। इस हमले में ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया, जिससे युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया।
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