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छत्तीसगढ़: गौरेला पेंड्रा मरवाही में कुप्रबंधन के चलते 20 हजार क्विंटल धान हुआ खराब, छह करोड़ का नुकसान

अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 14 Jan 2026 11:02 AM IST
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Due to mismanagement in Gaurela Pendra Marwahi, paddy stored at procurement centers has spoiled
GPM News - फोटो : अमर उजाला
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गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित के कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण दो धान संग्रहण केंद्रों - पेंड्रारोड के लोहराझोरकी व मरवाही के गुल्लीडांड में भंडारित 20 हजार क्विंटल धान अमानक हो गया है। यह धान लगभग 6 करोड़ 20 लाख रुपये का बताया जा रहा है। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

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धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसान बंपर पैदावार कर रहे हैं, और सरकार किसानों से धान खरीद रही है। धान की खरीदी के बाद उसके रखरखाव, प्रबंधन और चावल निकालने की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ मर्यादित की है। हालांकि, गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में वर्ष 2024-25 में खरीदे गए लगभग 14.57 लाख क्विंटल धान में से कुछ धान संग्रहण केंद्रों में भंडारित किया गया था। पेंड्रारोड में 22015 बोरों में 13059 क्विंटल और मरवाही के गुल्लीडांड में 13059 बोरों में 8133 क्विंटल धान संग्रहित था।
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वर्तमान में इन केंद्रों में रखा गया धान अमानक घोषित कर दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी का अनुसार, जांच में पता चला कि बोरों के अंदर धान खराब हो चुका है, उसकी जगह काला और सड़ा हुआ भूसा मौजूद है। जिन बोरों में 40 किलो धान आता था, वे अब मात्र 8-10 किलो के रह गए हैं। पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों संग्रहण केंद्रों में तीन बार फिजिकल वेरिफिकेशन में गुल्लीडांड में लगभग 800 बोरे और पेंड्रा रोड में 1000 से अधिक बोरों की कमी पाई गई। 

जिला विपणन अधिकारी हरीश शर्मा लगातार संपर्क करने पर भी जवाबदारी से बचते रहे। गुल्लीडांड के संग्रहण केंद्र प्रभारी ने मौसम को धान खराब होने का कारण बताया, लेकिन लाखों रुपये के रखरखाव और सुरक्षा खर्च के बावजूद करोड़ों का धान बर्बाद होना गंभीर सवाल खड़े करता है। 

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