GPM: नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की राइटर-फोटोग्राफर ने बैगा क्षेत्रों का किया भ्रमण, संस्कृति को मिलेगा बल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ग्रामीण जीवन और पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की राइटर एंजेला लोकाटेली एवं फोटोग्राफर हाजरा अहमद अंसारी ने जिले के बैगा बाहुल्य क्षेत्रों का भ्रमण किया।
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ग्रामीण जीवन और पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की राइटर एंजेला लोकाटेली एवं फोटोग्राफर हाजरा अहमद अंसारी ने जिले के बैगा बाहुल्य क्षेत्रों का भ्रमण किया। उन्होंने गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत लमना स्थित विलेज वे स्टे में प्रवास के दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन को नजदीक से समझा।
भ्रमण के दौरान टीम ने ग्राम लमना, बस्तीबगरा और आमगांव का दौरा कर बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों तथा सांस्कृतिक धरोहर का अवलोकन किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर जनजातीय समाज की जीवन पद्धति और प्रकृति के साथ उनके सामंजस्यपूर्ण संबंधों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान टीम ने जिले में पाए जाने वाले विभिन्न देशी प्रजाति के आमों का स्वाद भी लिया और उनकी विशेषताओं के बारे में जानकारी हासिल की।
अपने दौरे के दौरान नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की टीम ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे से सौजन्य भेंट की। अधिकारियों ने उन्हें जिले की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन संबंधी विशेषताओं से अवगत कराया। इस अवसर पर टीम ने जिले की पहचान माने जाने वाले प्रसिद्ध गौरा-गौरी नृत्य का आनंद भी लिया और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।
विलेज वे स्टे की ओर से मनीषा पांडे एवं संजय पयासी ने अतिथियों का स्वागत किया तथा ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय संस्कृति और जनजातीय जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं। नेशनल जियोग्राफी ट्रैवलर की टीम का यह दौरा जिले की जनजातीय संस्कृति, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति के संरक्षण को भी बल मिलेगा।

स्थानीय संस्कृति के संरक्षण को मिलेगा बल।।।

स्थानीय संस्कृति के संरक्षण को मिलेगा बल।।।