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मेकाज में डॉक्टरों का चमत्कार: बेटे ने पिता को मारे दो तीर, हाथ-पैर में गंभीर चोट; देर रात किया भर्ती

अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 20 Jan 2026 03:17 PM IST
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सार

सुकमा जिले में घरेलू विवाद के दौरान बेटे ने अपने पिता पर दो तीर चला दिए, जिससे एक तीर जांघ में और दूसरा कलाई के पास धंस गया। घायल को सुकमा अस्पताल से जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज मेकाज रेफर किया गया।

son shot his father with two arrows and received successful treatment in Mekaj
मेकाज में मरीज को जीवनदान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में बीती रात सुकमा से एक ग्रामीण को गंभीर अवस्था में लाया गया। बताया गया कि उसके बेटे ने आपसी विवाद के चलते उसे दो तीर मार दिए थे। सुकमा में पर्याप्त उपचार न मिल पाने के कारण उसे मेकाज रेफर किया गया था, जहां हड्डी रोग विशेषज्ञों ने देर रात बड़ी सावधानी से दोनों तीरों को निकालते हुए मरीज को जीवनदान दिया।

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तीर से घायल पिता का सफल ऑपरेशन सुकमा जिले में घरेलू विवाद के दौरान एक पुत्र ने अपने पिता पर तीर चला दिए। एक तीर जांघ में धंस गया, जबकि दूसरा कलाई के पास घुसकर हाथ की महत्वपूर्ण नस (नर्व) को दबा रहा था। स्थिति गंभीर होने के कारण घायल को सुकमा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन समय पर उपचार न मिलने पर जान का खतरा बढ़ गया था। घायल को तत्काल मेकाज रेफर किया गया।
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तत्परता से शुरू हुआ उपचार रात्रि लगभग 2 बजे मेकाज में आर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने तत्परता से उपचार शुरू किया। सहायक प्राध्यापक डॉ. आदित्य कौशिक ने विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीत पाल के मार्गदर्शन में जटिल शल्य प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चिकित्सकीय जांच में रोगी हेमोडायनामिक रूप से अस्थिर नहीं था, लेकिन कलाई में धंसा तीर नस पर दबाव बनाए हुए था, जिससे स्थायी नर्व डैमेज का गंभीर खतरा था।

विशेषज्ञता से बचाई नस की कार्यक्षमता टीम ने बड़ी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ दोनों तीरों को सुरक्षित रूप से निकाला। विशेष रूप से कलाई में की गई सटीक प्रक्रिया से हाथ की नस को होने वाली संभावित क्षति को समय रहते रोक लिया गया। 

इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. गुलाब सिंह काशी ने कुशलता से क्षेत्रीय एनेस्थीसिया प्रदान किया, जिससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हुई। चिकित्सकों के अनुसार, नसों के समीप ऐसी चोटें अत्यंत घातक हो सकती हैं। मध्य रात्रि में त्वरित निर्णय, अनुभवी हाथों और समन्वित टीमवर्क के कारण यह जीवन-रक्षक उपचार संभव हो पाया। वर्तमान में रोगी की स्थिति स्थिर है और हाथ की कार्यक्षमता सुरक्षित रहने की उम्मीद है।

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