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कबीरधाम में शिकारियों पर कार्रवाई: बायसन पर तीर चलाने वाले पांच आरोपी गिरफ्तार, धनुष-बाण बरामद
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: कबीरधाम ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 09:28 PM IST
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सार
कबीरधाम में बायसन पर तीर से हमला करने वाले पांच शिकारियों को वन विभाग ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से धनुष-बाण बरामद हुए। गंभीर रूप से घायल बायसन का रेस्क्यू कर इलाज किया गया और बाद में उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
बायसन पर तीर चलाने वाले पांच आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कबीरधाम में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां शिकार के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सरहापथरा गांव में दबिश देकर पंडरू, चैतुराम, शिवा, पताल सिंह और सुखराम को पकड़ा गया। इनके पास से शिकार में इस्तेमाल धनुष-बाण भी बरामद हुए हैं। सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर 27 मार्च को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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दरअसल, यह पूरा मामला एक वयस्क बायसन पर किए गए क्रूर हमले से जुड़ा है। जंगल से भटककर आबादी के करीब पहुंचे बायसन पर अंधेरे का फायदा उठाकर शिकारियों ने तीरों से हमला किया। उसके शरीर में तीन तीर धंसे मिले, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
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घटना की जानकारी मिलते ही वन परिक्षेत्र पंडरिया (पूर्व) के सीमावर्ती इलाके में कबीरधाम डीएफओ निखिल अग्रवाल के निर्देशन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की संयुक्त टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पिछले कुछ दिनों से इस बायसन के इलाके में घूमने की सूचना मिल रही थी और टीम उस पर नजर रखे हुए थी।
रेस्क्यू के दौरान स्थानीय वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. जडिया ने बायसन को निश्चेत कर उसके शरीर से एक तीर निकाला और प्राथमिक उपचार किया। हालांकि अगले दिन जांच में सामने आया कि बायसन अपने एक पैर का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रहा है। स्थिति गंभीर देखते हुए बिलासपुर से विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया।
डॉ. चंदन और उनकी टीम ने गहन जांच में पाया कि बायसन के पैर के भीतर दो और तीर गहराई तक धंसे हुए हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं दे रहे थे। इसके बाद दोबारा निश्चेत कर जटिल सर्जरी की गई और दोनों तीर सफलतापूर्वक निकाल लिए गए।
इलाज के बाद बायसन पूरी तरह स्वस्थ हो गया, जिसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इधर, वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और डॉग स्क्वाड की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई।
वन विभाग और वन विकास निगम की इस संयुक्त कार्रवाई ने न केवल एक बेजुबान वन्यजीव की जान बचाई, बल्कि शिकारियों के खिलाफ कड़ा संदेश भी दिया है कि जंगल में अवैध शिकार करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

