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कबीरधाम: बिना आदेश के बदल गए जमीन के नाम, रिकॉर्ड में गड़बड़ी से हड़कंप

अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम Published by: कबीरधाम ब्यूरो Updated Fri, 24 Apr 2026 08:04 PM IST
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सार

कबीरधाम जिले के बोड़ला तहसील अंतर्गत ग्राम बरभावर में भू-अभिलेखों में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था के पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Land Ownership Names Changed Without Official Orders Turmoil Ensues Over Record Irregularities in Kabirdham
आज शुक्रवार को ज्ञापन सौंपा गया।
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विस्तार

कबीरधाम जिले के बोड़ला तहसील अंतर्गत ग्राम बरभावर में भू-अभिलेखों में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था के पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना किसी वैधानिक आदेश के जमीन के रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन होने से प्रशासनिक तंत्र कटघरे में है। इस मामले में आज शुक्रवार को राजस्व पटवारी संघ ने अपर कलेक्टर विनय पोयाम को ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष गेंदूराम मरावी ने बताया कि ग्राम बरभावर के खसरा नंबर 29/7 (रकबा 0.607 हेक्टेयर) की भूमि पहले श्यामलाल पिता दुकालू (गोंड) के नाम दर्ज थी। उनकी मृत्यु बाद 6 जून 2025 को नामांतरण आदेश के तहत उनके वारिस भागीरथी सहित अन्य के नाम दर्ज किए गए थे। 8 सितंबर 2025 तक खसरा सूची में यही स्थिति बनी रही। लेकिन गिरदावरी रिपोर्ट निकालने पर अचानक इस भूमि में तीजनबाई पति सदाराम (ग्राम रौचन) का नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज पाया गया। बिना किसी प्रक्रिया के हुए इस बदलाव ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।

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सूचना के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
ज्ञापन देने पहुंचे पटवारियों ने बताया कि हल्का पटवारी ने 14 अक्टूबर 2025 को इस गड़बड़ी की जानकारी तहसीलदार बोड़ला को दी। इसके बाद तहसीलदार ने 15 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय को सूचित किया,लेकिन करीब 6 महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा इसी माह 15 अप्रैल 2026 को पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। संघ का कहना है कि भुइयां सॉफ्टवेयर में बिना आदेश नाम परिवर्तन संभव नहीं है। ऐसे में यह आशंका है कि सर्वर स्तर पर हस्तक्षेप कर बदलाव किया गया, जिसमें तकनीकी एजेंसी (NIC) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम रौचन में भी खसरा नंबर 73/1 और 40/1 में इसी तरह के बदलाव सामने आए हैं, जहां शासकीय भूमि तक निजी नामों में दर्ज हो गई।

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